केंद्रीय कारागार में सजायाफ्ता सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहित ने जेल के अस्पताल के पूरे डाटा को कंप्यूूटराइज्ड करने के बाद अब कोर्ट ऑटोमैटिक सिस्टम सॉफ्टवेयर विकसित किया है। इस सुविधा के माध्यम से न्यायालय में जाने वाले प्रत्येक कैदी और बंदी के केस का पूरा ब्यौरा एक बटन दबाते ही न्यायाधीश के सामने आ जाएगा। जेल प्रशासन डाटा कंप्यूटराइज्ड करने का कार्य सरकार की डिजीटल इंडिया योजना के तहत कर रहा है। रोहित ने सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक गुप्ता के समक्ष इस सॉफ्टवेयर का प्रदर्शन किया। न्यायाधीश ने कहा कि यह एक सुविधाजनक सॉफ्टवेयर है, जिससे कार्यप्रणाली को काफी आसान किया जा सकता है लेकिन इसे लागू करने के लिए उच्च न्यायालय की अनुमति जरूरी है। रोहित और आईटी एक्सपर्ट डॉक्टर जसमीत के संयुक्त प्रयासों से विकसित किए गए इस सॉफ्टवेयर में किस कैदी और बंदी को कब-कब समन जारी किए गए, कोर्ट की प्रत्येक तिथि पर केस की क्या प्रगति हुई, संबंधित व्यक्ति के विरुद्घ अंबाला के अलावा अन्य अदालतों में किस प्रकार के केस चल रहे हैं इत्यादि जानकारियां प्राप्त करने के लिए फाइलें ढूंढने के बजाए कंप्यूटर पर कुछ बटन दबाने की आवश्यकता होगी।सॉफ्टवेयर ही होगी समीक्षाजज दीपक गुप्ता ने कहा कि इस नए सॉफ्टवेयर में इस बात की समीक्षा करने की आवश्यकता है कि कैदी और बंदी से संबंधित किन-किन जानकारियों को अन्य लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। अब फिंगरप्रिंट स्टोर किए जाएंगेसॉफ्टवेयर विकसित करने वाले रोहित ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर अमल में आने के बाद किसी कैदी और बंदी को न्यायालय से अपने केस के मामले में कोई दस्तावेज मंगवाने के लिए किसी वकील और अपने संबंधी के सहयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी, बल्कि जेल के अंदर ही वह आसानी से दस्तावेज प्राप्त कर सकता है। वह सॉफ्टवेयर में ज्यूडीराइट सिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिसमें प्रत्येक कैदी और बंदी के फिंगरप्रिंट भी दर्ज किए जाएंगे। इससे अपराधियों द्वारा अपनी पहचान बदलने सहित अन्य सभी प्रकार की पहचान छिपाने की संभावनाओं पर भी अंकुश लगेगा।