फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: 174 डिब्बों के साथ दौड़ी शेषनाग मालगाड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
हरिंदर पाल सिंह
विज्ञापन

अंबाला। डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) ने शनिवार को इतिहास रच दिया। जब नवनिर्मित कॉरिडोर पर तीन मालगाड़ियों के डिब्बों के बराबर एक मालगाड़ी का संचालन किया।
मालगाड़ी का संचालन पंजाब के न्यू खन्ना रेलवे स्टेशन से उत्तरप्रदेश के पिलखनी स्टेशन तक किया । इस दौरान दो इंजन के साथ 174 डिब्बों को जोड़ा गया और इसका नाम शेषनाग रखा गया। मालगाड़ी ने लगभग 178 किमी के सफर को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से मात्र तीन घंटे में पूरा किया। इस दौरान मालगाड़ी पर डीएफसीसीआईएल के अधिकारियों के साथ उत्तर रेलवे के अधिकारी भी रेल इंजन में मौजूद रहे। वहीं बीच रास्ते मालगाड़ी के संचालन के दौरान भी चाक-चौबंद प्रबंध किए गए थे, जिससे कि कहीं कोई दिक्कत न हो।
विज्ञापन

मालगाड़ी के सफल संचालन से रेलवे अधिकारियों में काफी उत्साह का माहौल है। ऐसे में अब उन्हें उम्मीद है कि एक साथ तीन मालगाड़ियों के लोड को इस नए ट्रैक पर बिना किसी परेशानी के चलाया जा सकता है। इससे रेलवे को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और खर्च में कमी आएगी।
डबल डेकर की भी योजना
डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर पर डबल डेकर मालगाड़ी के संचालन की योजना भी तैयार की है। इसके लिए विशेष प्रकार के छोटे कंटेनर रेलवे ने पहले ही तैयार किए हुए हैं जोकि विशेष प्रकार की मालगाड़ी के माध्यम से एक जगह से दूसरी जगह पर भेजे जा सकते हैं। इस योजना पर भी डीएफसीसीआईएल अधिकारी मंथन कर रहे हैं, जिससे कि इन डबल डेकर डिब्बों का भी इस कॉरिडोर पर परीक्षण किया जा सके।
17 को चली थी पहली मालगाड़ी
पिलखनी से साहनेवाल तक रेलवे कॉरिडोर पर पहली मालगाड़ी का संचालन 16 जनवरी को हुआ थ्ज्ञा। 58 कोच की पिलखनी से चली मालगाड़ी ने 42 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से 175 किमी का सफर साढ़े चार घंटे में पूरा किया था जबकि पहले इस सेक्शन पर मालगाड़ी के संचालन में छह से अधिक घंटे का समय लगता था।
जुलाई 2016 में शुरू हुआ था यह काम

डीएफसीसीआईएल परियोजना के तहत अंबाला मंडल के अधीन का साहनेवाल से लेकर पिलखनी तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। यह कार्य जुलाई 2016 में शुरू हुआ था। यह परियोजना 2005 में बनी थी और 2006 में इसे मंजूरी मिली थी। इसके तहत तीन रेल सेक्शन को तैयार किया गया। पहला शंभू से साहनेवाल, दूसरा पिलखनी से कलानौर और तीसरा कलानौर से पिलखनी तक।
5500 करोड़ से की परियोजना पूरी
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) की ओर से बिछाए नए रेल लाइन की शुरुआती लागत तीन हजार करोड़ थी जो बाद में बढ़कर 5500 करोड़ तक पहुंच गई। इसमें 2500 करोड़ का सिविल वर्क, एक हजार करोड़ का सिग्नल और ओएचई कार्य और 1200 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण की कीमत शामिल है।
विज्ञापन


वर्जन
पंजाब के खन्ना से उत्तरप्रदेश के पिलखनी तक तैयार किए गए रेल कॉरिडोर पर शनिवार को शेषनाग मालगाड़ी का संचालन किया गया, यानी तीन मालगाड़ियों के 174 डिब्बों को एक साथ चलाया गया जोकि पूरी तरह से सफल रहा। मालगाड़ी के दोनों सिरों पर इंजन लगाए गए थे जोकि डिब्बों के संचालन में कारगर साबित हुए। आने वाले समय में इसी प्रकार मालगाड़ियों का संचालन किया जाएगा ताकि पैसे और समय की बचत हो और सामान भी सुरक्षित पहुंचे।
पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, डीएफसीसीआईएल अंबाला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें