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Ambala News: राइस मिलर्स बोले नहीं उठाएंगे धान

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अंबाला सिटी के जैन कॉलेज के नजदीक ​स्थित राइस मिल।
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अंबाला सिटी। एफसीआई गोदामों में नए सीजन के चावल रखने के लिए प्रदेशभर में जगह खाली नहीं है। पिछले साल के ही चावलों की अभी तक खपत नहीं हो पाई है और गोदामों में ढेर लगे हुए हैं जबकि अब नई फसल के मंडियों में आने की तैयारी हो रही है। इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने के कारण पैदावार भी अधिक मात्रा में आने की संभावना है।
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इस अधूरी तैयारियों को लेकर राइस मिलर एसोसिएशन में रोष है। मिलर्स का कहना है कि जब तक उनकी लंबित मांगे पूरी नहीं होती और गोदामों में प्रर्याप्त स्थान नहीं होता तब तक वे इस बार मंडियों से धान नहीं उठवाएंगे। ऐसे में प्रदेश भर के हजारों किसानों की मुसीबतें बढ़ना तय है।
जिला अंबाला के गोदामों में भी नई धान के चावल रखने के लिए जगह नहीं है। पिछले चार वर्षों से सरकार की तरफ से राइस मिलर्स को उतराई का भुगतान भी नहीं मिला है। जो पूरे प्रदेश का उतराई 500 करोड़ रुपये बनता है। पूरे प्रदेश में करीब 1500 राइस मिल हैं। जिला अंबाला में 250 राइस मिल हैं।
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इनमें से प्रत्येक मिल का कई लाख रुपये उतराई का कई लाख रुपये बकाया है। इसके अलावा धान की मिलिंग बढ़ाने को लेकर भी राइस मिलर्स रोष में हैं। मांगों को लेकर राइस मिल संचालक उच्च अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
चार वर्षों से नहीं मिला उतराई का खर्च, 500 करोड़ तक पहुंच चुका
उत्तरी हरियाणा राइस मिलर्स अंबाला, पंचकूला और यमुनानगर एसोसिएशन के प्रधान सतपाल का कहना है कि वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2024 तक की उतराई का पैसा उन्हें नहीं मिला है। जो अब 500 करोड़ के करीब पहुंच चुका है। इसलिए अब वे मांगे पूरी होने तक धान का उठान नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि एक प्रतिशत ड्राइ कीमत को भी आधा कर दिया गया है। जबकि नियम में एक प्रतिशत ड्राइ कीमत देने का प्रावधान है। धान को रखने के लिए वूडन क्रेट के लिए डेढ़ रुपये प्रति क्विंटल का नियम है लेकिन वह शुल्क भी अभी तक मिलर्स को नहीं मिला है। वे इन मांगों लेकर मुख्यमंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन उन्हें अभी तक सिर्फ आश्वासन दिया है।
20 वर्षों से नहीं बढ़ी मिलिंग
अंबाला राइस मिलर्स एवं डिलर्स एसोसिएशन अंबाला सिटी के प्रधान संजीव गर्ग ने बताया कि बीते 20 वर्षों से सरकार ने मिलर्स की मिलिंग को 10 रुपए से नहीं एक रुपया भी नहीं बढ़ाया है जबकि महंगाई अपने चरम पर है। ऐसे में मिलर्स को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस पर भी सरकार उनका बकाया भुगतान करने में देरी लगा रही है।
250 मिलर्स के लाखों रुपये बकाया
राइस मिलर एसोसिएशन अंबाला के चेयरमैन अशोक अग्रवाल ने कहा कि अंबाला में करीब 250 मिल संचालक है। जिनका लाखों रुपए बकाया है। गोदामों से चावल एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए भी राइस मिलर्स को अपनी जेब से शुल्क देना पड़ता है।
हाइब्रिड चावल पर रोक लगाए सरकार
अंबाला राइस मिलर्स एसोसिएशन के सचिव गौरव गुप्ता ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से हाइब्रिड धान अधिक आ रहा है। हाइब्रिड बीज से चावल कम और टुकड़ा अधिक निकलता है। इसका खामियाजा राइस मिलर्स को भुगतना पड़ता है। वहीं गोदामों में भी जगह नहीं है। अंबाला जिला में बीते वर्ष का चावल भी अभी तक रखा हुआ है।
निदेशालय की ओर से गोदामाें में जगह बनाने की तैयारी जारी है। सरकार के निर्देशों पर ही गोदामों से चावल भेजा जा रहा है। अंबाला में भी गोदामों को खाली करने के लिए प्रयास जारी है।
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अपार तिवारी, डीएफसी जिला अंबाला।

अंबाला सिटी के जैन कॉलेज के नजदीक स्थित राइस मिल।

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