अंबाला सिटी। शहर के धुरकड़ा गांव के पास एक रिजोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में मोटिवेशनल स्पीकर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंची। यह कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज कंच घर की ओर से कराया। शिवानी दीदी के पहुंचने पर शहर विधायक असीम गोयल समेत अन्य अतिथियों ने उनका स्वागत किया।
सभी अतिथियों ने शिवानी दीदी के साथ मंच पर दीप प्रज्जवलित किया और उनको सुनने के लिए पहुंचे सभी लोगों ने भी अपने मोबाइल की टार्च से लाइटिंग की।इस अवसर पर शिवानी दीदी ने द सिक्रेट ऑफ गाॅड, कर्मा, डेस्टिनी विषय पर संबोधित किया। उन्होंने भाग्य, कर्म, हमारी सोच और दिनचर्या के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। शिवानी दीदी ने कहा कि कर्मों का हिसाब-किताब शरीर का नहीं आत्मा का है। हमने पहले जो कर्म किए हैं, वह वर्तमान में वापस आ रहे हैं। उसी समय जो हम सोचते हैं, बोलते हैं और व्यवहार करते हैं, वह हमारे वर्तमान कर्म है। जो सामने जा रहे हैं। हम जो वर्तमान में कर्म करेंगे, वह वापस भविष्य बनकर आएगा।
उन्होंने कहा कि जिस समय हमें भगवान की ज्यादा जरुरत होती है, तब हम उनसे नाराज हो जाते हैं। जैसे सोशल मीडिया में तस्वीर खींच जाती है। ऐसे ही हमारे कर्मों की तस्वीर खींच रही है। वह तस्वीर डिलीट व एडिट नहीं हो सकती। हमारी सोच, व्यवहार, हमारी भावना सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा है। हमें अपने मस्तिष्क में अच्छी सोच, अच्छा व्यवहार, अच्छे बोल यह फोटो खींचनी है। उन्होंने इंटरनेट बंद होने पर सभी से पूछा कि बिना इंटरनेट के कितना अच्छा लग रहा है, इस पर सभी ने कहा कि उन्हें हल्का महसूस हो रहा है।
इस पर शिवानी दीदी ने कहा कि यह इसलिए अच्छा लग रहा है, क्योंकि हमें थकावट कम हो रही है। हम दिनभर स्क्रीन को देखते रहते हैं। हमें कभी-कभी इंटरनेट बंद करके बात करनी चाहिए। उन्होंने सभी को 24 घंटे का प्रण भी दिलवाया ताकि एक दिन अच्छा व्यवहार, अच्छा बोल व अच्छा सोचकर देखें कि उनको अगले दिन कैसा महसूस होगा। उन्होंने कहा कि भगवान को भाग्य विधाता कहा जाता है। भगवान हमें सही कर्म करना सिखाता है। भगवान ने मनुष्य को भाग्य लिखने की शक्ति दी है। उन्होंने कहा कि जहां जरूरत नहीं है, वहां ध्यान नहीं जाना चाहिए। सभी का भाग्य अलग-अलग है और सभी का कर्म भी अलग-अलग है। अपने जीवन की नींव को मजबूत बनाना चाहिए। जो भी कर्म होगा, उसका सामना करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम सोचते कुछ और हैं और बोलते कुछ और हैं। यह मिलावट नहीं होनी चाहिए। सबके लिए अच्छा सोचना चाहिए। अगर कोई बात बोलने लायक नहीं है तो वह बात सोचने लायक भी नहीं है। रिश्ते बोल व व्यवहार से नहीं बल्कि सोच से बनते हैं। अगर रिश्ता मजबूत रखना है तो सच्चाई बोलनी चाहिए। सच भी प्यार व सम्मान से बोलें। मिलावट हमारे रिश्तों को खत्म करती है। सच्चाई और सफाई अंदर एक जैसी होनी चाहिए। हमारी शक्ति झूठ बोलने में जा रही है। हमें मिलावट खत्म करनी है। हमारे दिमाग से तब तक कुछ नहीं निकलता जब तक हम सोचते नहीं है। मेरी सोच मेरा संस्कार है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई हमारे साथ गलत कर रहा है तो उसका गलत करने या सोचने की बजाए उसको दुआएं दें। ऐसा करने से हमारा खुद का ही अच्छा होगा। दुआएं देने से सोच अच्छी होगी। अगर किसी से कोई बात या अनबन हो गई तो उसको माफ करके जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। बातों को दिमाग में पकड़ना नहीं है।