संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला-अमृतसर नेशनल हाइवे पर राजकीय रेलवे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास चल रहा अवैध निर्माण दो माह पहले शुरु किया गया था। खस्ताहाल निर्माण स्थल पर लगी पुरानी ईंटों को तोड़कर इसे एक गोदाम का आकार दिया जा रहा था। इसके लिए चार शटर भी लगा दिए गए थे और पांचवें शटर सहित लेंटर डालने की तैयारी हो रही थी और इसकी भनक न तो कैंटोनमेंट बोर्ड को लगी और न ही रक्षा संपदा विभाग को। लगभग दो माह तक नेशनल हाइवे किनारे यह निर्माण दिन के उजाले में चलता रहा और इसे रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था। जबकि एक माह पहले स्टेशन पर ही तैनात एक अधिकारी ने जब इस निर्माण को देखा तो इसकी जानकारी और वीडियो रेलवे के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की। इस ग्रुप में सभी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी हैं। इसके बाद भी किसी ने मौके पर जाकर हालात देखने और निर्माण करने वाले व्यक्ति से पूछताछ करने की कोशिश नहीं की। उल्टा एक माह के अंदर ही चारों तरफ दीवारें खड़ी करके शटर भी लगा दिए गए। यह खुलासा रेलवे द्वारा की गई प्राथमिक जांच में सामने आया है। अब इस मामले की तह तक जान के लिए रेलवे की तरफ से कैंटोनमेंट बोर्ड को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई है कि जमीन का स्टेट्स क्या है और इसे किसी व्यक्ति को लीज पर दिया गया है ताकि बिना रेलवे से बिना एनओसी लिए काम करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
गौरतलब है कि रेलवे एसपी कार्यालय के पास लीज की जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा था, बाकायदा इस जगह पर शटर भी लगा दिए गए थे। मामले ने जब तूल पकड़ा और रेलवे भी हरकत में आया तो कैंटोनमेंट बोर्ड ने इसकी जांच करवाई और जानकारी सामने आई कि यह पुराने समय एक बंगला था जोकि रक्षा संपदा विभाग के अधीन है, लेकिन जमीन का संबंध कैंटोनमेंट बोर्ड से था तो बोर्ड ने तुरंत कार्रवाई करते हुए काम को रुकवा दिया है। वहीं निर्माण करने वाले लीज धारक को नोटिस भी जारी करके जवाब मांगा कि बिना विभागीय जानकारी के उसने तोड़फोड़ करके कैसे शटर लगा दिया।
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यह जगह काफी पुरानी है। पहले यह पूरी जगह कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन होती थी। लेकिन अब एसपी कार्यालय के साथ बनी आरपीएफ बैरक तक बनी जगह रेलवे के पास है। इसके साथ लगती लगभग आधा एकड़ जमीन किसकी है। इसकी जानकारी कैंटोनमेंट बोर्ड से मांगी गई है।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल
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