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Ambala News: रेलवे का उत्तर भारत के व्यापारियों को तोहफा, 1200 करोड़ से तैयार होगा खानआलमपुरा यार्ड

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हरिंदर पाल सिंह
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अंबाला। लगभग 1200 करोड़ की लागत से खानआलमपुरा यार्ड का स्वरूप बदला जाएगा। यहां आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी जो कि क्रेन की सुविधा से लैस होंगी और मालगाड़ी के किसी भी क्षतिग्रस्त डिब्बे को हटाकर चंद मिनटों में ही नया कोच लगाने में सक्षम होंगी। वहीं रेल इंजनों में अगर कोई खराबी आएगी तो उसे भी कंप्यूटरीकृत सिस्टम से दुरुस्त किया जा सकेगा। इस कार्य में फ्रांस की टेक्निकल टीम भी अपना सहयोग देगी। रेलवे की यह योजना जम्मू कश्मीर से लेकर हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और उत्तर प्रदेश तक के व्यापारियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। अंबाला मंडल रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन में इस योजना की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है जोकि आगामी कुछ दिनों में रेलवे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। योजना के सिरे चढ़ने और बजट अलॅाट होते ही खानआलमपुरा यार्ड का नवीनीकरण शुरु कर दिया जाएगा। यह यार्ड पूरी तरह से कवर होगा और सीसीटीवी से लैस होगा ताकि चोरी व अन्य किसी प्रकार की घटना न हो सके। संवाद







डीएफसीसीआईएल की अहम कड़ी


खानआलमपुरा रेल यार्ड डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की एक अहम कड़ी होगा, क्योंकि इस ट्रैक पर सिर्फ मालगाड़ियों का संचालन होगा और वो बिना रुके 6 से 7 घंटे तक चलेंगी। ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर जो कि हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होता हुआ कोलकाता तक जाता है। देश के अन्य हिस्सों को जाने वाली मालगाड़ियों का ठहराव भी इसी यार्ड में दिया जाएगा और यहीं मालगाड़ियों व इंजनों का रख-रखाव भी होगा। इस कार्य में फ्रांस की टेक्निकल टीम की मदद भी ली जाएगी।
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20 मालगाड़ियां एक साथ होंगी खड़ी


खानआलमपुरा यार्ड को एयरपोर्ट की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। यहां 20 से अधिक रेल लाइनों को बिछाया जाएगा। मौजदूा समय में अभी 10 से 12 मालगाड़ियां ही यार्ड में आती हैं। वहीं यह यार्ड सहारनपुर और मुरादाबाद की तरफ जाने वाले रेलवे लाइन के मध्य बना हुआ है, इसलिए इस यार्ड में मालगाड़ियों का सीधा प्रवेश होगा। इससे मेल व एक्सप्रेस यानी यात्री ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा।







तीन हजार करोड़ की लागत से तैयार हो रहा ट्रैक



उत्तर प्रदेश के पिलखनी से पंजाब के साहनेवाल तक लगभग तीन हजार करोड़ की लागत से डेडिकेटेड फ्रेट कारिडाेर का निर्माण किया जा रहा है जो कि अंतिम चरण में है। जून माह में पहले चरण के तहत शंभू से साहनेवाल, दूसरे चरण में पिलखनी से कलानौर और तीसरे चरण में पिलखनी से साहनेवाल तक मालगाडियों का संचालन शुरू किया जाएगा। बीच रास्ते में सामान को चढ़ाने व उतारने के लिए नए रेलवे स्टेशन और यार्ड तैयार किए गए हैं ताकि यात्री ट्रेनों का संचालन प्रभावित न हो।







78 साल पुराना है यार्ड



सहारनपुर रेलवे स्टेशन के पास बना खानआलमपुरा यार्ड लगभग 78 वर्ष पुराना है। यह यार्ड 1945 में अस्तित्व में आया था। कई बार मालगाड़ियों की रिपेयरिंग में काफी समय लग जाता था और इस कारण व्यापारियों का सामान खराब हो जाता था। समय अनुसार, इसमें थोड़ा बदलाव किया गया। वर्ष 1996 में यह यार्ड अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद इसका संचालन शुरू हो गया था। इस यार्ड को सहारनपुर और मुरादाबाद जाने वाली रेलवे लाइन के मध्य बनाया गया है ताकि मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित न हो और मालगाड़ी सीधा यार्ड में प्रवेश कर जाए।







आने वाले दिनों में खानआलमपुरा यार्ड का स्वरूप बदल जाएगा। यहां आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इस कार्य पर लगभग 1200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस संबंध में एक विस्तृत योजना तैयार की गई है जो कि जल्द ही रेलवे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस योजना से व्यापारी वर्ग को काफी फायदा होगा और मालगाड़ियों का बिना किसी बाधा के संचालन होगा।
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मंदीप सिंह भाटिया, रेल प्रबंधक, अंबाला मंडल।


यह सुविधा व्यापारियों के लिए एक तोहफे के रूप में है। इससे समय से उनका सामान दूसरे राज्याें में पहुंच सकेगा, जिससे समय के साथ धन की भी बचत होगी। वहीं व्यापारियों को समय से माल मिलेगा तो वह आगे ग्राहकों तक सुविधाजनक तरीके से माल पहुंचा सकेंगे।
-गौरव सोनी, महासचिव, असीमा


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