अंबाला सिटी। जिले की 15 मंडियों में गेहूं खरीद और उठान का कार्य धीमी गति से चल रहा है। इस कार्य में कई रोड़े हैं मगर उनका समाधान पहले दिन से लेकर अभी तक नहीं किया गया। वहीं हैरानी की बात है कि मंडी की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारी ही गुमराह कर रहे हैं। हालात यह हैं कि अभी तक मंडियों में 19 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है मगर उठान महज 10 लाख क्विंटल ही हुआ है। जबकि 9 लाख क्विंटल उठान होना बाकी है।
मंडियों में उठान ठीक से न हो पाने की कई वजह हैं। मगर सोमवार को जब नए उपायुक्त डॉ शालीन आए तो उन्होंने आते ही सभी एसडीएम की बैठक ली। जिसमें मंडी व्यवस्था प्रमुख मुद्दा रही। मगर हैरानी की बात है कि इसमें अधिकारियों ने बताया कि मंडियों में तरीके से कार्य हो रहा है। सभी कार्य समय पर चल रहे हैं और किसी को कोई परेशानी नहीं है। मगर हकीकत इससे इतर है। जो प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलती नजर आती है।
बारिश से बचने के नहीं किए थे इंतजाम : पूर्व में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सचेत किया था कि हरियाणा में तेज बारिश आ सकती है। इसको लेकर सरकार ने भी तय समय में उठान कराने के निर्देश दिए थे। खुद कृषि मंत्री जेपी दलाल शहजादपुर की मंडी में 18 अप्रैल तक मंडी खाली करने के निर्देश देकर गए थे। मगर यह निर्देश भी हवा हो गए। नतीजा यह हुआ कि बारिश आई और मंडियों में गेहूं से भरी बोरियां भीग गईं। जिसके बाद अब गेहूं का सुखाया जा रहा है।
अफसरों का दावा : उठान सही, हकीकत अलग
जिला की सभी मंडियों में अभी तक करीब 10 लाख क्विंटल गेहूं का उठान हो चुका है। यह कार्य काफी धीमा है। इसमें दिक्कत है कि खरीद देरी से शुरू हुई, वहीं मंडी में श्रमिकों की कमी है। इस कारण से उठान ठीक से नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही इस बार एफसीआई और विशेष रेल मूवमेंट के जरिए ही अधिक गेहूं उठाया जा रहा है। जबकि सभी गोदामों में माल नहीं भेजा जा रहा है।
ये कहते हैं किसान नेता
फसलों में 50 से 80 प्रतिशत नुकसान हुआ है। कहीं कम तो कहीं ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। अगर किसानों को नुकसान न होता तो वह क्षतिपूर्ति पोर्टल पर माथापच्ची क्यों करते। हमें उम्मीद है कि सही से नुकसान का सत्यापन किया गया होगा । -बजिंदर कंबोज, अध्यक्ष, कोर कमेटी हरियाणा, भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह
खराबा ज्यादा नहीं : प्रशासन
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर गेहूं के सीजन में अंबाला से 416 गांवों में 4940 किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर खराबे को लेकर सूचना दी थी। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों का इस पर कहना है कि सत्यापन का अधिकतर कार्य भी कर लिया गया है। जिला में फसलों का खराबा ज्यादा नहीं हुआ है।