अंबाला सिटी। सेक्टर-7 स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रही श्रीराम चरित्रमानस रामायण पाठ की कथा में प्रतिदिन की तरह पं. धर्मेद्र गौड व पं. त्रिलोचन शर्मा द्वारा विधिवत मंत्रोच्चारण किया गया। समाजसेवी रंजनी कपूर परिवार द्वारा पूजन आदि के कार्य संपन्न करवाए, तत्पश्चात श्रीगणेश वंदना प्रस्तुत कर संगीतमयी श्रीराम चरित्रमानस रामायण पाठ की कथा का शुभारंभ किया गया। कथा व्यास पं. भगवती प्रसाद पुरोहित ने रावण के राक्षस रूपी जन्म के संदर्भ में कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राजा प्रताप भानु बहुत भाग्यशाली थे और उन्हें धर्म रुचि नामक एक बहुत बुद्धिमान और धार्मिक विचारों का मंत्री मिला, जिन्होंने राजा को अपनी प्रजा की देखभाल करने के बारे में सलाह दी। उनके मार्गदर्शन से प्रताप भानु ने अपने राज्य में काफी मजबूती प्राप्त हुई, मगर एक बार राजा प्रताप भानु जंगल में शिकार करने गए जहां पर शाम होने पश्चात वह एक मुनि के यहां पहुंचे और पानी पीने की गुहार लगाई। इस दौरान मुनि ने महाराज को पहचान लिया और राजा का हर प्रकार से शिष्टाचार करने पश्चात महाराज ने नींद लेने की इच्छा जताई। राजा के सो जाने पश्चात राक्षस प्रजाति से संबध रखने वाला एक नकली मुनि वहां पहुंच गए और उसने राजा से कहा कि राजा कोई भी वरदान मांग लो तुम्हारी सभी इच्छाएं पूरी होंगी, लेकिन एक शर्त रहेगी कि उन्हें एक वर्ष तक प्रतिदिन एक हजार ब्राह्मणों को भोजन कराना होगा, उस भोजन को हमारे मुनि द्वारा तैयार किया जाना चाहिए। तीन दिनों बाद राजा ने अपने राज्य के सभी ब्राह्मणों को भोजन करने के लिए निमंत्रण भेजा और उन्हें नकली रसोइये ने जानवरों के मांस सहित अधिकांश घटिया सामग्रियों से तैयार किया गया भोजन परोसा और जब इकठ्ठे हुए अतिथि भोजन की ओर प्रस्थान करने लगे तो एक आकाशवाणी हुई जिसमें ब्राह्मणों को यह अशुद्ध और घिनौना भोजन न करने की चेतावनी दी गई। जिसपर ब्राह्मण क्रोधित हो गए और उन्होंने प्रताप भानु को श्राप दे दिया कि वह अपना राज्य खो देगा, वह स्वयं नष्ट हो जाएगा और वह अगले जन्म में एक राक्षस बन जाएगा। जिस कारण राजा प्रताप भानु को राक्षस प्रजाति में पैदा होना पड़ा, जोकि रावण के नाम से प्रसिद्ध रहा है। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने भगवान श्रीराम दरबार में आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।