हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। आज के बदलते परिवेश में अपराध का आंकड़ा बढ़ता जा है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के आत्मरक्षा की चिंता बढ़ती जा रही है। अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा आत्मरक्षा में माहिर हो और समय रहते अपराधी से निपट सके। वहीं इस प्रतिभा का आंकलन, जिला, राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कर सके।
अभिभावकों की इस पीड़ा को अंबाला छावनी निवासी हेमंत शर्मा दूर कर रहे हैं। वे छोटे बच्चों सहित बड़ों को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर। हेमंत शर्मा की अपनी एक विशेष पहचान है और उन्हें कूडो मार्शल आर्ट में महारत हासिल हैै। मौजूद समय में वो कूडो मार्शल आर्ट के एशियन जज, इंडिया टीम के कोच, निदेशक शिटोरियू कराटे एसोसिएशन ऑफ इंडिया और आईटीबीपी कमांडो विंग मसूरी के तकनीकी निदेशक भी हैं।
वहीं स्पोर्ट्स कूडो एसोसिएशन ऑफ हरियाणा के अध्यक्ष भी हैं जोकि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं जोकि प्रतियोगिताओं में कूड़ो जैपनीज मार्शल आर्ट्स का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अंबाला का नाम विश्वपटल पर रोशन कर रहे हैं। हेमंत ने बताया कि कूड़ो जैपनीज मार्शल आर्ट्स कॉम्बैट को पिछले पांच वर्षों से लगातार सिखाया जा रहा है।
इसे भारत सरकार व खेल मंत्रालय एवं स्कूल गेम फैडरेशन आफ इंडिया से भी मान्यता मिली हुई है। इस वर्ष हरियाणा स्कूल गेम में भी इस खेल की प्रतियोगिता कारवाई जाएगी ताकि खिलाड़ियों का सर्वांगीण विकास हो ओर सभी खिलाड़ी कुडो खेल की ओर आकर्षित हो सके और कूडो मार्शल आर्टस को हरियाणा राज्य में पूर्ण रूप से विकसित किया जा सके। संवाद
अंबाला के छाए होनहार
आत्मरक्षा में माहिर होकर बड़ा सुकुन मिलता है। हेमंत सर इस खेल में जी-जान से जुटे हुए हैं। कूडो मार्शल आर्ट से शरीर भी चुस्त-दुरुस्त रहता है। इस खेल के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल प्राप्त किए हैं। यह खेल आज की एक विशेष पहचान बन गया है। सभी को इसमें माहिर होना चाहिए। - हरमन सिंह।
पहले खेल में रुचि नहीं थी। फिर जब अभ्यास शुरु किया तो इसमें मजा आने लगा। प्रशिक्षक हेमंत शर्मा ने जो गुर सिखाए वो आत्मरक्षा में एक विशेष पहचान रखते हैं। कूडो मार्शल आर्टस को सभी को सीखना चाहिए, चाहे वो लड़की हो या फिर लड़का। यह एक सम्मान का भी विषय बन गया है। - गुरनूर सिंह।
छोटी उम्र से ही अभ्यास शुरु कर दिया था। अभी तक जिला, राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुका हूं। इसके लिए अंबाला प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया गया और 15 अगस्त पर हरियाणा सरकार द्वारा 51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। अब यह खेल मेरे अंदर पूरी तरह से समा चुका है। - तेजस शर्मा।
अभिभावकों को गर्व
आज के बदलते परिवेश में बेटियों की चिंता अभिभावकों के लिए बेहद आवश्यक है। ऐसे में आत्मरक्षा के लिए कूडो मार्शल आर्ट ही एक मात्र विकल्प है। बेटी इस खेल में माहिर हो रही है और पदकों की झड़ी लगा रही है जोकि मेरे लिए एक विशेष उपलब्धि है और इसका श्रेय कोच को जाता है। मंजू शीना यादव, अभिभावक।
बेटा पहले इस खेल से डरता था। फिर उसकी धीरे-धीरे रुचि बढ़ने लगी। कोच हेमंत ने बड़ी मेहनत से बेटे को इस खेल में माहिर किया है और बेटे ने कई उपलब्धियां भी हासिल की हैं। अभी तो यह शुरुआत है। इस खेल में पूरी तरह परिपक्व होने के लिए कुछ समय लगेगा। इसके लिए बेटे को प्रशिक्षण की बेहद आवश्यकता है। - राजिंदर सिंह, अभिभावक।
कोच बोले - कूड़ो मार्शल आर्ट सीखने वाला नहीं खाता मात
कूड़ो मार्शल आर्ट एक खेल ही नहीं बल्कि आत्मरक्षा को वो पैंतरा है जो अगर एक बार सीख गया तो फिर वो कहीं मात नहीं खा सकता। अभी तक 500 से अधिक खिलाड़ी इसका प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और प्रदेश,देश व दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं। इस खेल का प्रशिक्षण प्रत्येक उम्र के बच्चे और बड़े प्राप्त कर रहे हैं। - हेमंत शर्मा, विशेषज्ञ एवं कोच, कूड़ो मार्शल आर्ट।