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मानसिक तनाव के चलते सैंट्रल जेल में अपना रहे आत्महत्या का रास्ता, नशे की गिरफ्त में कैदी व बंदी

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अंबाला की सेंट्रल जेल इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है। चाहे फिर हवालातियों द्वारा आत्महत्या करने की बात हो या फिर नशा व मोबाइल मिलने की। पिछले दो माह की बात करें तो दो हवालाती मानसिक रूप से तनाव में आकर आत्महत्या कर चुके हैं। वहीं कुछ ने जाने देने का प्रयास किया लेकिन समय रहते उन्हें बचा लिया गया। हालांकि जेल प्रबंधन की ओर से इन बंदियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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इतना ही नहीं जेल में बंदी व कैदी नशे की गिरफ्त में पड़ते जा रहे हैं। यहीं कारण है कि जेल के भीतर के अलावा पेशी भुगतने जा रहे बंदियों व कैदियों से तलाशी के दौरान नशा बरामद हो रहा है। बावजूद इस पर किसी भी तरह की रोक नहीं लग पा रही है।
तीन जुलाई को भाजपा पन्ना प्रमुख व उसके बेटे को गोली मारकर कार लूटने के आरोपी राजपुरा पंजाब के गांव नलाकलां निवासी नाजरगिर गत शुक्रवार को ही जेल में सुसाइड किया है। हालांकि, परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। अंबाला सीआईए- 1 ने 7 जुलाई को आरोपी नाजरगिर को गिरफ्तार करके 3 दिन के रिमांड पर लिया था, जिसके बाद आरोपी को सेंट्रल जेल भेज दिया था।
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पटवी पुलिस चौकी में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी जगाधरी (यमुनानगर) निवासी गुरमीत सिंह का शव 29 जून को पेड़ पर लटका मिला था। जेल प्रशासन के मुताबिक, हवालाती बंदी ने जेल में आने के एक दिन बाद ही पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उस वक्त गुरमीत के परिजनों ने भी हत्या की आशंका जताई थी।
सेंट्रल जेल में 4-जी जैमर लगाने का प्रस्ताव अटका पड़ा है। हालांकि जेल प्रबंधन की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जेल में सुरक्षा अधिक पुख्ता हो सके। उधर, 3-जी जैमर लगा होने से हवालातियों के हाथों में स्मार्ट फोन काम कर रहे हैं। यहीं कारण है कि चेकिंग के दौरान कईं बार कैदियों से मोबाइल व सिम बरामद हो रहे हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बता दें कि पहले भी सेंट्रल जेल में जैमर लगाए गए थे, लेकिन आसपास रिहायशी इलाके में लोगों को आने वाली परेशानी को देखते हुए इसे बंद कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद फिर से 2016 में जेल में 3-जी जैमर लगाए गए थे।
कैदियों व बंदियों की समय-समय पर काउंसलिंग की जाती है। आत्महत्या करने वालों की भी काउंसलिंग की गई थी। अचानक ऐसा कदम क्यों उठाया यह उन्हें भी जानकारी नहीं है। जेल में 3-जी की जगह 4-जी जैमर लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।
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लखबीर सिंह बराड़, सुपरिटेंडेंट, सेंट्रल जेल।
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