अंबाला। हरियाणा रोडवेज साझा मोर्चा के चक्का जाम का बुधवार को मिलाजुला असर दिखाई दिया। चक्का जाम का सफल बनाने के लिए किलोमीटर स्कीम के तहत लगी बसों के प्रेशर पाइप काट दिए गए। इसके कारण दरवाजे न तो बंद हो रहे थे न खुल रहे थे। वहीं कुछ बसों की चाभी निकाल ली गईं थी। ऐसे में मेकेनिकों को बुलाया गया और इन बसों को संचालित किया गया। इसके बाद कर्मचारी नेताओं ने चाभी लौटा दीं।
वहीं रोडवेज प्रशासन ने 125 बसों को अपने गंतव्य के लिए रवाना कर दिया। इसमें किलोमीटर स्कीम की बसें भी शामिल रहीं।इसके लिए रोडवेज विभाग के अधिकारियों ने एक दिन पहले ही रणनीति बना ली थी। रणनीति के तहत बसें वर्कशॉप पर न खड़ी कर अंबाला सिटी व छावनी के बस अड्डों तक पहुंचा दी थी। कर्मचारी नेता कुछ समझ पाते तब तक सुबह 40 बसों को रवाना कर दिया गया। हालांकि कुछ स्थानीय रूटों पर बसें नहीं चलीं। इस कारण यात्रियों को परेशानी हुई।
सुबह छावनी में सूचना मिली कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत लगे परिचालकों ने साझा मोर्चा को समर्थन दे दिया है। उसी समय मौके पर जीएम रोडवेज पहुंच गए। उन्होंने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत लगे 34 परिचालकों को बैठक के लिए बुला लिया। इसमें परिचालकों को समझाकर दो-दो परिचालकों की ड्यूटी लगाकर बसें रवाना कर दी गईं। इसके बाद हरियाणा कौशल रोजगार निगम के परिचालकों ने समर्थन वापस ले लिया।
दूसरी ओर साझा मोर्चा के तहत कर्मचारी सुबह अंबाला सिटी स्थित वर्कशॉप में एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने शहर बस अड्डे में किसी भी बस को आने-जाने से नहीं रोका। वहीं अंबाला कैंट में रात ढाई बजे साझा मोर्चा के कर्मचारी नेता बस स्टैंड पर पहुंच गए। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि चक्का जाम सफल रहा। इस मौके पर महाबीर पाई डिपो प्रधान, रमेश शौकंद यूनियन प्रधान, जयवीर गणगश, रविंद्रपाल सिंह, आनंद कुंडू, बलविंद्र सैनी सहित अनेक रोडवेज चालक व परिचालक मौजूद रहे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि समय पर उनकी मांगो को नहीं माना गया तो आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अंबाला से पटियाला, कालका, चंडीगढ़, शिमला, दिल्ली, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर व अन्य रूटों पर बसों को भेजा गया। मगर जितनी तादाद में पहले बसों को रवाना किया जाता था उतनी संख्या में बसें नहीं संचालित हो सकीं। इसके कारण यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं स्थानीय स्तर पर बसों का संचालन प्रभावित हुआ। यहां पर निजी बसों ने यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया।
यात्रियों को चंडीगढ़ जाने के लिए नहीं मिली बसें
सिटी के बस स्टैंड से सुबह कुछ रोडवेज बसें अंबाला से होती हुई चंडीगढ़, हिसार, कैथल व सिरसा की ओर गई थी। वहीं दोपहर बाद हिसार, सिरसा, कैथल व फतेहाबाद की ओर से आने वाली बसों ने अंबाला में ठहराव नहीं किया। बसों ने सवारियों को अग्रसेन चौक के पास उतारा और अपने डिपो की तरफ चली गई। वहीं छोटे रूट पेहवा, नारायणगढ़, कैथल अन्य स्थानों के लिए निजी बसें चली।
चक्का जाम को लेकर विभाग की तरफ से जो निर्देश आएंगे वैसी कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों से अपील की गई थी कि वह चक्का जाम न करें। सभी रूटों पर बसें गईं हैं। -अश्वनी डोगरा, महाप्रबंधक, अंबाला डिपो
मंगलवार की रात को छावनी बस स्टैंड पर बसें लगा दी गईं थी। बुधवार को छावनी, नारायणगढ़ से करीब 125 बसें चलाई गई। हड़ताल के दौरान 80 प्रतिशत बसें संचालित हुईं। -विपुल नांदल, ट्रेफिक मैनेजर, अंबाला रोडवेज।
साझा मोर्चा की हड़ताल कामयाब रही है। हमने रोडवेज वर्कशाप से एक भी बस नहीं निकलने दी। प्रशासन ने 35 बसें ही चलाई हैं। मांगें नहीं मानी गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। -जयबीर घनघस, राज्य महासचिव।
इन मांगों के चलते रही हड़ताल
मुख्य मांगो में हिट एंड रन भारतीय न्याय संहिता काले कानून को तुरंत वापस लिया जाए, 265 मार्गों पर असीमित परमिट पॉलिसी को वापस लेकर रोडवेज बेड़े में नई बसें खरीदी जाएं, परिचालक, चालक, लिपिकों की वेतन विसंगति दूर की जाए, देय अवकाश कटौती पत्र वापस लिया जाए, बसों के मरम्म्त कार्य कंपनी को न दिया जाए, 2016 में भर्ती हुए चालकों सहित दादरी डिपो के 52 सहायकों को पॉलिसी बना कर पक्का किया जाए, 2002 में भर्ती हुए चालकों को नियुक्ति से पक्का करके इन्हें पुरानी पेंशन योजना में शामिल किया जाए, कर्मचारियों को कॉमन कॉडर से बाहर करके तकनीकी पदों पर पदोन्नति दी जाए, कई वर्षों के बकाया बोनस का भुगतान करना शामिल है।