अंबाला। छावनी की जनता से जुड़े दो अहम मुद्दे आज भी लंबित हैं। न तो कुत्तों की नसंबदी का काम शुरू हो पाया है और न ही बेसहारा गोवंश को सहारा देने का।
अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि एक गली में 15 से 20 कुत्तों का जमावड़ा और पांच से सात के बीच बेसहारा गोवंश नजर आना आम बात हो गई है। इसका खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है जोकि कुत्ते के काटने से तो कभी गोवंश के टक्कर मारने से घायल हो रहे हैं।
इस गंभीर होती समस्या पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई, लेकिन अब लगता है कि आने वाले समय में इन दोनों समस्याओं से निजात मिल जाएगी। छावनी के लोगों के लिए पहली राहत बेसहारा गोवंश को लेकर है, इसकी निविदा जारी करके ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। इस बार बेसहारा गोवंश को लगभग 1300 रुपये प्रति दर से पकड़ा जाएगा जबकि दो वर्ष पहले यह रेट 1100 रुपये प्रति पशु की दर से थे।
नहीं मिल रही गोशाला
वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद बाद ठेकेदार अभी तक काम शुरु नहीं कर पाया है क्योंकि उसे गोशाला नहीं मिल रही, जहां वो बेसहारा गोवंश को रख सके। इसलिए इस समस्या के समाधान को लेकर नगर परिषद के अधिकारी गोशाला संचालकों से संपर्क साधने में जुट गए हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार इसके लिए तीन गोशालाओं को चिह्नित किया गया है,जहां बेसहारा गोवंश के रहने व खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी।
वर्जन
बेसहारा गोवंश को सहारा देने का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। पकड़े गए पशुओं को किस गोशाला में रखना है, इस पर मंथन जारी है। कुत्तों की नसंबदी को लेकर भी कार्रवाई चल रही है, जल्द इसे भी फाइनल कर दिया जाएगा।
जरनैल सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर।