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Ambala News: बैडमिंटन मुकाबलों में खिलाड़ी लगा रहे पदकों की झड़ी

Sun, 12 May 2024 04:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। छावनी के सुभाष पार्क के पास बैडमिंटन हॉल बनने के बाद खिलाड़ियों में जोश काफी बढ़ गया है। यहां पर तैयार हो रही खिलाड़ियों की फौज जिला व राज्य स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और अपनी जीत का लोहा मनवा रही है।
रोजाना सुबह से शाम तक खिलाड़ी यहां पर प्रशिक्षण ले रहे हैं और घंटों अपना पसीना बहाने के बाद बैडमिंटन के गुर सीख रहे हैं ताकि सामने वाले खिलाड़ी को कैसे चंद मिनटों में हराया जा सके। कई खिलाड़ी तो बैडमिंटन हाल में प्रशिक्षण लेकर ऑल इंडिया गेम्स में भी भाग ले चुके हैं।
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बैडमिंटन की अकादमी में 8 साल से 19 साल व उससे बड़े भी नियमित तौर पर प्रशिक्षण लेकर पदक हासिल कर रहे हैं। बता दें कि बैडमिंटन हॉल में एक साथ चार मुकाबले हो सकते हैं। इसमें अकादमी के अलावा बैडमिंटन प्रेमियों के खेलने के पास भी बनाए जाते हैं।
पिछले पांच साल से ले रहा हूं प्रशिक्षण
एकता विहार निवासी 18 वर्षीय हरिकेश ने बताया कि अंबाला में दो बार होने वाले डिस्टि्रक में गोल्ड मेडल हासिल किए। स्टेट डबल क्वार्टर में फाइनिलिस्ट रहा। पिछले पांच साल के प्रशिक्षण में अभी तक करीब 15 पदक हासिल कर चुका हूं। आगे भी इसी तरह बेहतरीन प्रदर्शन कर माता-पिता व कोच का नाम रोशन करना है और इंटरनेशनल लैवल तक पहुंचना है।
एयरफोर्स स्कूल ऑल इंडिया में लिया हिस्सा
सैन्य क्षेत्र निवासी 21 वर्षीय अयान ने बताया कि उसके पिता एयरफोर्स में है। वह 2019 में एयरफोर्स स्कूल ऑल इंडिया प्रतियोगिता में भाग ले चुका हूं और दूसरा स्थान हासिल किया था। इसके अलावा जिला व राज्य स्तर में भी काफी पुरस्कार हासिल किए।
पिता, बहन ने किया बैडमिंटन के लिए प्रेरित
रेलवे कॉलोनी निवासी 28 वर्षीय नितिन ने बताया कि छोटी उम्र से ही बैडमिंटन का प्रशिक्षण ले रहा हूं। पिता भी रेसलर रह चुके हैं और बहन भी बैडमिंटन की खिलाड़ी है। उन्होंने भी समय-समय पर खेल के लिए प्रेरित किया है। वह ऑल इंडिया लैवल भी खेल चुकी है और केवीएस नेशनल में भी टॉप 8 में रहा हूं। अभी स्कूल में बतौर शिक्षक भी नियुक्त हूं।
विश्वविद्यालय स्तर पर खेल रही
सिटी के जंडली निवासी 18 वर्षीय नंदिनी ने बताया कि एसडी कॉलेज की छात्रा हूं और यूनिवर्सिटी लैवल भी खेल रही हूं। इसके अलावा 2021 , 2023 में डिस्टि्क खेल चुकी हूं। हालांकि विजेता नहीं रही लेकिन रनरअप का खिताब हासिल किया। अब अपनी कमियों को दूर कर पदकों की संख्या को बढ़ाना है ताकि माता-पिता के साथ-साथ कोच का नाम रोशन कर सकूं।
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बच्चों को खेलों में कराएं प्रतिभाग
शुरूआत से ही बच्चे को शिक्षा के साथ-साथ खेल में भी आगे ले जाना चाहिए ताकि वह समय के साथ दोनों में ही महारथ हासिल कर अपना नाम चमका सके। खेल से न केवल बच्चे का मनोबल बढ़ता है और वह स्वस्थ भी रहता है। बच्चे को इतने बड़े मैदान पर खेलते देखकर मन को बेहद अच्छा लगता है। - संजय, अभिभावक।
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