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Ambala News: टांगरी में अतिक्रमण के खिलाफ लामबंद कॉलोनियों के लोगों ने किया प्रदर्शन

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अंबाला। टांगरी नदी में हुए अतिक्रमण के विरोध में रविवार को आधा दर्जन कॉलोनियों के सैकड़ों लोग एकजुट हो गए। लोगों ने जमकर नारेबाजी करते हुए सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
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करीब एक घंटे तक लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि पिछली बार आई बाढ़ का मंजर अभी तक वे भूले नहीं है और अब मानसून सिर पर है। जबकि टांगरी की स्थिति यह है कि अतिक्रमण इस कदर हो चुका है कि नदी के नीचे से गुजरने वाले नौ पिलरों में से महज चार ही पूरी तरह से खुले हैं, जहां से पानी जा सकता है। ऐसे में बारिश के दौरान उन्हें फिर बाढ़ के हालात से जूझना पड़ सकता है।
टांगरी की जद में बसी कॉलोनी अर्जुन नगर, लक्ष्मीपुरा, विश्वकर्मा नगर, न्यू टैगोर गार्डन, सरसेहड़ी, रामपुर, चंद्रपुरी आदि कॉलोनी के निवासी बेबी, रोहित, आकाश, मोहित, रजनी, सोनिया का कहना था कि पिछली बाढ़ में उन्होंने अपना सब कुछ गवां दिया था। सारा सामान खराब हो गया था, लेकिन बचाव के लिए इस बार भी कोई प्रयास नहीं किया गया। अभी तक तटबंध की स्थिति भी ज्यों की त्यों हैं। जगह-जगह से मिट्टी खिसक रही है। जल्द ही टांगरी नदी से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और बांधों को मजबूत नहीं किया गया तो क्षेत्रवासी उपायुक्त से मुलाकात करेंगे और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
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आक्रोशित महिलाओं और पुरुषों ने टांगरी नदी के ठीक पास शटर लगी दो दुकानों का भी जमकर विरोध किया जो टांगरी की जद में बनकर तैयार हुई है। यह दुकान पुल के चौथे पिलर के ठीक पास बनी हुई है। वहां पर मलबा डालकर टाइलें भी लगा दी गई हैं। ऐसे में पहाड़ों में बरसात आएगी तो पानी कॉलोनियों की तरफ मार करेगा। विरोध प्रदर्शन की सूचना पाकर सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता कृष्ण कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। साथ ही अतिक्रमण कर बनाई गई दुकान के मालिकों को एक दिन का समय दिया कि वह खुद हटा लें। अगर वह नहीं हटाते हैं तो सिंचाई विभाग की तरफ से टांगरी नदी के बहाव में बाधा पहुंचाने के तहत कार्रवाई करते हुए दुकानों को तोड़ा जाएगा।

यह उठाई लोगों ने मांगें
- बब्याल व रामपुर सरसेहड़ी बांध को पत्थर लगाकर मजबूत करना
- रामपुर सरसेहड़ी में 42 सौ फीट तो बब्याल में 76 सौ फीट का बांध तैयार होना था, उसका काम जल्द पूरा करना
- माइनिंग का भी काम जल्द शुरू कर गहराई बढ़ाई जाए
- जगह-जगह टांगरी में हो रहा अतिक्रमण हटाया जाए
- करधान में जो पुल बनाने के लिए मिट्टी डाली गई है उसे हटाया जाए, ताकि बहाव कॉलोनियों के तरफ न हो

फोटो नंबर - 68
अनदेखी के कारण अतिक्रमण हो रहा
अर्जुन नगर निवासी दलजीत सिंह ने कहा कि टांगरी नदी के नीचे नौ पिलर हैं। पानी इन्हीं पिलरों से होकर आगे जाता है। स्थिति यह बन गई है कि नदी के पांच पिलर तक दुकानों आदि का निर्माण हो रहा है जो कि सरासर गलत है। पानी का बहाव तेज नहीं होगा तो कॉलोनी में मार होगी।

फोटो नंबर - 69
अधूरी तैयारी से मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
लक्ष्मी नगर निवासी सुशील शास्त्री का कहना है कि बरसातों के आने से पहले ही संबंधित विभाग को बांध मजबूत करने व अतिक्रमण हटाने का काम पूरा कर देना चाहिए था। अभी तक इन कामों के टेंडर ही नहीं जारी हो सके हैं। बरसातों के आने तक यह काम शुरू भी नहीं होगा। फिर बाढ़ के हालातों का खतरा मंडरा रहा है।

फोटो नंबर - 70
पहाड़ों की बरसात बनेगी आफत
प्रेमा ने बताया कि वह 40 साल से टांगरी नदी की जद में रह रही हैं। पिछली बरसातों में आई बाढ़ के कारण सारा सामान खराब हो गया था। अभी टांगरी के जो हालात हैं वो हैरान करने वाले हैं कि कोई काम नहीं हुआ। पहाड़ों में भारी बरसात हुई तो दोबारा बाढ़ आने के आसार है।
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फोटो नंबर - 72
नदी की चौड़ाई हो रही खत्म
विश्वकर्मा नगर निवासी बेबी ने बताया कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण अबकी बार डर सता रहा है कि पानी घरों में न घुस जाए। टांगरी नदी में देखते ही देखते भीतर मकान बनते जा रहे हैं और नदी की चौड़ाई भी खत्म हो रही है।

टांगरी नदी में डीएवी स्कूल के पास से शुरू होकर रामपुर तक बांध बनाने व पत्थर लगाने का टेंडर जारी कर दिया है। साढ़े तीन करोड़ की लागत से इस काम को किया जाएगा। बाकी कामों के टेंडर भी जल्द कर दिए जाएंगे। जिस दुकान को लेकर लोगों ने रोष जताया है उसे हटाने के लिए मालिक ने एक दिन का समय मांगा है। वह नहीं हटाता है तो उस पर कार्रवाई कर हटा दिया जाएगा। उनकी तरफ से बचाव को लेकर सभी तैयारियां है।
कृष्ण कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग

फोटो: 20 से 29
घग्गर नदी का जल स्तर बढ़ा तो होगी परेशानी, प्रशासन ने नहीं किए इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। मानसून आने वाला है इससे अंबाला वासियों को एक बार फिर से बाढ़ का खतरा सता रहा है। लोगों को डर है कि इस बार भी कहीं बारिश के कारण उनकी फसल खराब न हो जाए। वहीं सिंचाई विभाग का तर्क है कि उन्होंने अपने स्तर पर नदियों को सुरक्षित बनाने के लिए पुख्ता इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। अंबाला शहर और पंजाब सीमा के बीच सटी घग्गर नदी में भी जगह-जगह से मिट्टी खिसक रही है। नदी पर बने पुल के नीचे तो पत्थर व अन्य इंतजार किए गए हैं। खेतों की तरफ इस प्रकार की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। बीते वर्ष भी घग्गर नदी पर सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण पानी आस पास के खेतों में भर गया था, जिससे कई एकड़ में फसलें खराब हो गई थी।

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पांच वर्षों से ड्रेन पड़ी खराब
घग्गर नदी के पास रहने वाले रामपाल ने बताया कि बीते पांच वर्ष से नाले पर बनाई गई ड्रेन खराब पड़ी है। न तो उससे पानी रोका जा सकता है और न ही छोड़ा जा सकता है। इससे बारिश के समय पूरे क्षेत्र में पानी भर जाता है।
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विभाग की तरफ से कोई इंतजाम नहीं
किसान डिंपल ने बताया कि बीते वर्ष आई बाढ़ में उनके खेतों में चार चार फुट तक पानी भर गया था। इससे उन्हें धान की फसल दोबारा लगानी पड़ गई थी।लेकिन अभी तक विभाग की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है।

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मरम्मत के लिए नहीं आया कोई
किसान जसवंत सिंह ने बताया कि उनका खेत घग्गर नदी के नजदीक है। बीते वर्ष उनकी दो एकड़ जमीन में 10 फुट तक पानी भर गया था। जसवंत ने कहा कि उनके खेतों से बिजली की तार बहुत नीचे से गुजर रही है। ऐसे में अगर बाढ़ आई तो करंट लगने से बड़ा हादसा भी हो सकता है। विभाग की तरफ से मरम्मत के लिए भी कोई नहीं आया है।
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पहले भी परिवार बाल-बाल बचा
घग्गर नदी के नजदीक रह रहे किसान छोटा राम ने बताया कि वह यहां पर किसी के खेतों की रखवाली का काम करता है। बीते वर्ष आई बाढ़ के कारण वह अपने आठ परिवारिक सदस्यों के साथ बाल- बाल बचे हैं। नदी के पानी को किनारे से ऊपर आने से रोकने के लिए किसी भी प्रकार का इंतजाम नहीं किया गया है।
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