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केवट की भक्ति से शिक्षा लेते हुए अपने जीवन में भगवान से सुख शांति की करनी चाहिए कामना - पं. भगवती प्रसाद

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सेक्टर सात स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में चल रहे सामूहिक श्री 108 रामायण का पाठ की पूजा अर्चना व प्रसाद की सेवा सुभाष अग्रवाल परिवार की ओर से की गई। इस दौरान कथा व्यास पाठ की पूजा का कार्यक्रम पंडित धमेंद्र गौड व पंडित त्रिलोचन शर्मा की ओर से विधिपूर्वक करवाया गया। संगीतमय गणेश वंदना प्रारंभ कर श्री रामायण पाठ का शुभारंभ किया गया, वहीं पंडित भगवती प्रसाद ने श्री रामायण पाठ की कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि केवट उन लोगों को कहा जाता था जो अपनी नाव में बिठाकर लोगों को नदी पार करवाते थे। जब भगवान श्रीराम अपनी पत्नी देवी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास पर निकले तो, रास्ते में उनकी भेंट अपने मित्र निषादराज से हुई भगवान श्रीराम को गंगा पार करवाने के लिए निषादराज एक केवट को बुलाते हैं। निषादराज ने केवट को कहा कि वह अपनी नाव में भगवान श्रीराम को माता सीता व लक्ष्मण सहित गंगा के उस पार लगा दे, यह सुनते ही केवट ने साफ मना कर दिया और कहा कि उसने सुना हैं कि श्रीराम के चरण अद्भूत हैं। उनके चरणों की धूल किसी चमत्कारी जड़ी बूटी से कम नहीं हैं। लोग इनके चरणों की धूल पाने की चाह में रहते हैं। इसलिए मैं पहले इनके चरण धोऊंगा उसके पश्चात ही गंगा पार करवाऊंगा। केवट ने अपनी पत्नी से एक जल का पात्र मंगवाया व गंगा के पानी से प्रभु श्रीराम के चरण धोए व उस जल को ग्रहण किया। इस तरह केवट ने न केवल भगवान के प्रति अपनी भक्ति सिद्ध की अपितु भगवान के चरण कमलों का जल ग्रहण कर स्वयं का उद्धार किया। केवट ने तीनों को अपनी नाव में बिठाया तथा खुशी-खुशी गंगा के उस पार लगा दिया। भगवान श्रीराम ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर सीता को अपनी अंगूठी उसे उपहार स्वरूप देने को कहा। माता सीता ने अपनी अंगूठी निकाल कर केवट को देनी चाही लेकिन केवट ने इसे लेने से मना कर दिया। इस प्रसंग से हम सभी को यह शिक्षा मिलती है कि हमें सब पता होने के बाद भी हम भगवान से भौतिक वस्तुओं की मांग करते हैं। उसी के सुख-दुख में खोए रहते है यदि वह केवट भी उस समय सोने की अंगूठी ले लेता तो, वह उसे मोक्ष के रूप में मिले उपहार के सामने तुच्छ होता। इसलिए अपने जीवन में भगवान से सुख शांति व जीवन को सफल बनाने की मंगल कामना करनी चाहिए। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया। सभी भक्तजनों ने भगवान श्रीराम जी की विशेष आरती की व प्रसाद ग्रहण किया।
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