फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: एक लाख की ईनामी कुश्ती 20 को

विज्ञापन
बाबा मोहन दास व उनके गुरु रामरतन दास की प्रतिमा।
विज्ञापन
अंबाला सिटी। सिद्ध समाधि बाबा मोहन दास की याद में आयोजित होने वाले खट्टे के मेले में पहली बार एक लाख की ईनामी कुश्ती होगी। यह दंगल क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। दंगल 20 मार्च को मेले वाले दिन दोपहर बाद आयोजित किया जाएगा।
विज्ञापन

प्रबंधक कमेटी के सदस्यों और सरपंच प्रतिनिधि गुरचरण सिंह ने बताया कि गांव के विदेशों में रह रहे युवाओं के सहयोग व उनकी बाबा मोहन दास के प्रति श्रद्धा के चलते यह विशेष कुश्ती कराई जाएगी। इसके अलावा दूसरी कुश्ती 51 हजार की होगी। दंगल दोपहर बाद से लेकर शाम तक चलेगा।

महंत तड़के चार बजे होंगे आसन पर विराजमान

युवा महंत मुरारी दास तड़के चार बजे से समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने के लिए आसन पर विराजमान होंगे। जहां पर हर कोई आगंतुक बाबा मोहन दास की समाधि पर माथा टेकने के बाद महंत मोरारी दास से भी आशीर्वाद ग्रहण करेगा। साथ ही श्री रामचरित मानस का अखंड पाठ चलेगा। समस्त ग्रामिणों के सहयोग से भंडारे का भी प्रबंध किया जाएगा।
विज्ञापन

यह है बाबा मोहन दास का इतिहास
बाबा मोहन दास आनंदपुर जलबेड़ा गांव के ही निवासी थे। बचपन से ही साधू संतों की संगत और भगवान के प्रति प्रेम के कारण उनके जीवन में ईश्वर के प्रति वैराग था। करीब 400 साल पहले से ही उनके भक्तिमय जीवन से लोग लाभ प्राप्त कर रहे हैं। बाबा ने दातुन से इमली के पेड उगाए थे। इमली खट्टी होने के कारण यह मेला खट्टे के नाम पर भरता है। बाबा हरिद्वार में ग्रामीणों के साथ गंगा स्नान के लिए गए थे। संध्या वंदन के बाद बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि गांव में ओलावृष्टि होने वाली है। लोगों के अनुनय विनय के बाद बाबा मोहन दास ने सारे ओले अपने खेतों में उतार लिए थे। इससे सारे किसानों की फसलें बच गई थी। लोग भी तभी से हर छमाही की फसल के बाद डेरे में अनाज देने लगे थे। जो परंपरा आज भी बरकरार है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से बाबा के आगे नतमस्तक होकर मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करता है उस मनोकामना को बाबा जल्द ही पूरा कर देते हैं। जिस कारण हर मंगलवार बाबा के समाधि स्थल पर भगतों का तांता लगा रहता है लेकिन मार्च महीने में आने वाली आंवला एकादशी के दिन आयोजित होने वाले इस मेले की कुछ बात ही अलग होती है। इस मेले में गांव के सभी लोग विभिन्न प्रकार की सेवाएं पहले से ही ले लेते है। सेवा मिलने पर वह अपने आप को भाग्यशाली मानते हैं।

बाबा मोहन दास व उनके गुरु रामरतन दास की प्रतिमा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें