नारायणगढ़। रातगढ़ साहिब गुरुद्वारे में सीएम के आगमन से पहले बेदबी के आराेपों को गुरुद्वारा प्रबंधन ने सिरे से खारिज कर दिया। इस संबंध में नारायणगढ़ में रातगढ़ गुरुद्वारा में प्रबंधन पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें प्रधान नरेंद्र सिंह ने अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को गुरमत समागम की जो वीडियो वायरल किया है और जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे गलत और बेबुनियाद हैं। समागम में गुरुग्रंथ साहिब की कोई जांच नहीं की गई। केवल मौके पर अचानक से आए तीन सुरक्षा कर्मियों ने मोमेंटो व मिठाई के बॉक्स को देखा।
इसके बाद वह चले गए। इसके कुछ देर बाद ही सीएम नायब सिंह सैनी आम श्रद्धालु की तरह आए और गुरु ग्रंथ साहिब के सामने नतमस्तक हुए। इस दौरान कमेटी ने उन्हें सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने गुरु अर्जुनदेव व गुरु तेग बहादुर के प्रकाशपर्व की बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि गुरुओं की कुर्बानी को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। विश्व उनका ऋणी रहेगा। कमेटी पदाधिकारियों ने कहा कि अगर फिर भी किसी को यह गलत लगता है तो हम क्षमा मांगते हैं। इस दौरान सचिव व अन्य पदाधिकारी मौदूर रहे।
फोटो: 35
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को बर्खास्त करने की मांग
मुलाना। दोसड़का स्थित गुरुद्वारा में सिख संगत द्वारा एक बैठक का आयोजन किया। यह बैठक दोसड़का गुरुद्वारा प्रधान जसबीर सिंह खालसा की अध्यक्षता में की गई।
इस दौरान सिख संगत ने नारायणगढ़ में श्री गुरु तेगबहादुर जी के प्रकाश उत्सव के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब जी की पालकी के नीचे मेटल डिटेक्टर से तलाशी लेने के चलते रोष प्रकट किया। जसबीर सिंह खालसा ने कहा कि नारायणगढ़ में 29 अप्रैल को गुरुद्वारा रातगढ़ साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के प्रकाश उत्सव में मुख्यमंत्री नायब सैनी को पहुंचना था। इस दौरान सुरक्षा दस्ता ने गुरुद्वारा साहिब के अंदर गुरुद्वारा साहिब की चेकिंग की।
इससे सिख संगत में रोष की लहर है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से संगत वहां की गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से इस बारे वहां जाकर जवाब मांगेगी । गुरु ग्रंथ साहिब हमारे लिए सब कुछ है। वहां मर्यादा की उल्लंघना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी । जसबीर खालसा ने उक्त गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को बर्खास्त करने की मांग की।
इस अवसर पर जरनैल सिंह जैली, प्रहलाद सिंह,राजिन्द्र सिंह कोकी ,हरजिन्द्र बराड़ा,रविन्द्र बसंतपुरा,परमजीत सिंह खानअहमदपुर, गोपाल सिंह डुलियाना, अजीत सिंह, गुरमीत सिंह वधवा, कैप्टन भूपिंद्र सिंह, गुरजीत सिंह धीन, जसपाल सिंह तंदवाल और कुलबीर सिंह मौजूद रहे।