मौजूदा समय में कालका शिमला सेक्शन पर रेल मोटर कार के अलावा टॉय ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन ट्रेनों में नाममात्र ही सुविधाएं हैं। लेकिन स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट में अव्वल स्तर की सुविधाएं हैं जोकि शताब्दी एक्सप्रेस में होती हैं। इस ट्रेन की सीटें काफी आरामदायक हैं। वहीं एयर कंडीशनिंग और वाई-फाई के अलावा, फायर अलार्म, बोतल होल्डर, लाइट सहित अन्य कई खूबियां हैं।
विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग 120 साल का हो गया है। 9 नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। अपने 118 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है। यह रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल में आता है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग नेरोगेज लाइन है। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।
कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे विश्व धरोहर में शामिल किया था। कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते यह पुल 64.76 किमी पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं।
कालका से 41 किमी दूर बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास बड़ोग सुरंग है, जिसे सुरंग नंबर 33 भी कहते हैं। 1143.61 मीटर लंबी सीधी सुरंग है। इसे बनाते हुए जब दोनों सिरे नहीं मिले थे तो ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने एक रुपया जुर्माना लगने के कारण आत्महत्या कर ली थी। बाद में बाबा भलकू के सहयोग से यह सुरंग पूरी हुई थी।
स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट का परीक्षण 22 किमी प्रतिघंटा की गति पर किया गया। ट्रेन ने कालका से शिमला तक पहुंचने में साढ़े चार घंटे का समय लिया। जबकि पहले से संचालित ट्रेन साढ़े पांच से छह घंटे का समय लेती हैं। नई ट्रेन के संचालन से यात्रियों के समय की काफी बचत होगी और उन्हें सफर के दौरान शताब्दी एक्सप्रेस जैसी अनुभूति होगी। -मंदीप सिंह, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला।