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यात्रियों को राहत: 4 घंटे में कालका से शिमला पहुंचेंगे सैलानी, शताब्दी की तर्ज पर चलाई गई स्व-चालित DHMU ट्रेन

Sat, 23 Dec 2023 09:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)

सार

स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट का परीक्षण अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन आरडीएसओ बेंगलुरू के अधिकारियों की निगरानी में किया जा रहा है। 22 किमी प्रतिघंटे की गति से किए गए परीक्षण के दौरान ट्रेन ने चार घंटे में अपना सफर पूरा किया।
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कालका रेलवे स्टेशन पर खड़ी स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कालका से शिमला का सफर दो घंटे कम हो जाएगा। 96 किमी के इस सफर को पूरा करने में चार घंटे का समय लगेगा। उत्तर रेलवे ने विश्व धरोहर रेल सेक्शन कालका-शिमला ट्रैक पर शताब्दी की तर्ज पर चलाई गई स्व-चालित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट (डीएचएमयू) ट्रेन का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है।

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यात्रियों की पहली पसंद बनेगी ट्रेन
22 किमी प्रतिघंटे की गति से किए गए परीक्षण के दौरान ट्रेन ने चार घंटे में अपना सफर पूरा किया। जबकि ट्रेन के संचालन की गति क्षमता 30 किमी प्रतिघंटा है। लेकिन रेल सेक्शन पर कुछ तीव्र व घुमावदार मोड़ हैं, इसलिए इस गति पर ट्रेन का संचालन रेलवे के लिए चुनौती भरा रहेगा।

हालांकि रेलवे की योजना है कि कालका से शिमला तक सफर करने वाले यात्रियों के समय में बचत हो ताकि अधिक से अधिक यात्री इस सेक्शन पर सफर करके प्राकृतिक सौंदर्य को निहार सकें। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि जिस प्रकार सड़क मार्ग पर दबाव बढ़ता जा रहा है और रोजाना शिमला जाने वाले वाहन सड़कों पर ही फंसे रहते हैं। ऐसे में यह ट्रेन एक नया आयाम स्थापित करेगी और यात्रियों की पहली पसंद बन जाएगी।
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61 यात्रियों के भार पर होगा आंकलन
स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट का परीक्षण अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन आरडीएसओ बेंगलुरू के अधिकारियों की निगरानी में किया जा रहा है। जहां पहले ट्रेन का परीक्षण खाली डिब्बों के साथ किया गया था। अब इसका परीक्षण यात्री क्षमता के आधार पर किया जाएगा। प्राप्त जानकारी अनुसार ट्रेन में 61 यात्रियों के बैठने की क्षमता तीन डिब्बों में है। इसलिए यात्रियों की संख्या के आधार पर वजन का उपयोग किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि इंजन बिना किसी गड़बड़ी के चल सकता है या नहीं। अगर यह सफल रहा तो फिर ट्रेन का संचालन यात्रियों के लिए शुरू हो जाएगा।

सुविधाओं में होगी अव्वल

मौजूदा समय में कालका शिमला सेक्शन पर रेल मोटर कार के अलावा टॉय ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन ट्रेनों में नाममात्र ही सुविधाएं हैं। लेकिन स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट में अव्वल स्तर की सुविधाएं हैं जोकि शताब्दी एक्सप्रेस में होती हैं। इस ट्रेन की सीटें काफी आरामदायक हैं। वहीं एयर कंडीशनिंग और वाई-फाई के अलावा, फायर अलार्म, बोतल होल्डर, लाइट सहित अन्य कई खूबियां हैं।

120 साल पुराना है रेल सेक्शन

विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग 120 साल का हो गया है। 9 नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। अपने 118 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है। यह रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल में आता है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।

103 सुरंगें आकर्षण का केंद्र

कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग नेरोगेज लाइन है। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।

जुलाई 2008 में मिला विश्व धरोहर का दर्जा

कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे विश्व धरोहर में शामिल किया था। कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते यह पुल 64.76 किमी पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं।

बाबा भलकू के सहयोग से पूरी हुई थी सुरंग

कालका से 41 किमी दूर बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास बड़ोग सुरंग है, जिसे सुरंग नंबर 33 भी कहते हैं। 1143.61 मीटर लंबी सीधी सुरंग है। इसे बनाते हुए जब दोनों सिरे नहीं मिले थे तो ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने एक रुपया जुर्माना लगने के कारण आत्महत्या कर ली थी। बाद में बाबा भलकू के सहयोग से यह सुरंग पूरी हुई थी।
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परीक्षण 22 किमी प्रतिघंटा की गति पर किया

स्वचलित डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट का परीक्षण 22 किमी प्रतिघंटा की गति पर किया गया। ट्रेन ने कालका से शिमला तक पहुंचने में साढ़े चार घंटे का समय लिया। जबकि पहले से संचालित ट्रेन साढ़े पांच से छह घंटे का समय लेती हैं। नई ट्रेन के संचालन से यात्रियों के समय की काफी बचत होगी और उन्हें सफर के दौरान शताब्दी एक्सप्रेस जैसी अनुभूति होगी। -मंदीप सिंह, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला।
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