अंबाला सिटी। बीते 10 जुलाई को अंबाला क्षेत्र में बने बाढ़ जैसे हालातों को क्षेत्र के किसान अभी तक भूल ही नहीं थे कि सोमवार को तेज गति से बहते पानी ने किसानों की फसल को तबाह कर दिया।
बता दें कि बीते करीब 15 दिनों के किसान अपने-अपने खेतों में धान की फसल लगाने में जुटे थे, पिछले दिनों खेतों में आई बाढ़ ने किसानों की सभी फसलें बर्बाद कर दी थी, मगर जैसे-तैसे कुछ किसानों ने अपने खेतों में दोबारा से धान की फसल लगा दी थी और कुछ अभी तक लगा रहे थे।
अचानक से आए घग्गर के पानी ने उनकी बची हुई उम्मीदों पर भी पूरी तरह से पानी फेर दिया। इस मौके पर शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के यूथ प्रधान सतविंदर सिंह ने बताया कि गांव डंगडेहरी, मानकपुर और डंडियाना के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल पानी में दोबारा से बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने दी जानकारी में कहा कि पंजाब के लालड़ू के नजदीक गांव टीवाणा के साथ गुजर रही घग्गर नदी का करीब आठ एकड़ का बांध टूट गया।
यह पानी पंजाब के गांव खजूर मंडी, सद्दोपुर, डंगडेहरा से होते हुए हरियाणा क्षेत्र के गांव डंगडहेरी, मानकपुर और डंडियाना से एनएच हाईवे 152-डी से होते हुए एनएच-44 के साथ लगती ड्रेन तक पहुंचा, जहां ड्रेन के माध्यम से वह पानी दोबारा घग्गर नदी में गिर रहा है, लेकिन पंजाब क्षेत्र में बांध टूटने के कारण अंबाला क्षेत्र के तकरीबन तीन गांव के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।
मलकीत की पांच तो दलबीर की 10 एकड़ फसल खराब
इस मौके गांव डंगडेहरी में करीब 30 एकड़, मानकपुर और डंडियाना क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों एकड़ की फसल पर पानी फिर गया। इस दौरान गांव डंगडेहरी के किसान ध्यान सिंह ने बताया कि पानी के कारण उनकी पांच एकड़, मलकीत सिंह की पांच एकड़, दलबीर सिंह की 10 एकड़ और बहादुर सिंह की करीब सात एकड़ फसल जो दोबारा लगाई थी, पूरी तरह से बह गई। इसी प्रकार गांव मानकपुर के किसान लखविंद्र सिंह, स्वर्ण सिंह, परमजीत सिंह, भाग सिंह, मेहर सिंह, धर्म सिंह, बहादुर सिंह, गुरदीप सिंह और नछत्तर सिंह ने बताया कि अचानक उनके क्षेत्र में आए घग्गर नदी के पानी ने किसानों की भारी संख्या में फसलों को बर्बाद कर दिया है।
नहीं भूले थे पहली तबाही, दूसरी आ गई
इसी प्रकार गांव डंडियाना के बिंद्र सिंह, जगदीप सिंह, कृपाल सिंह, हरदीप सिंह, करनैल सिंह, टोनी सिंह, भरपूर सिंह, जगतार सिंह और करनैल सिंह किसानों ने बताया कि बीते 10 जुलाई में बने बाढ़ जैसे हालातों को किसान अभी तक भूल नहीं पाए थे कि अचानक घग्गर नदी के टूटे बांध के कारण किसानों द्वारा दोबारा लगाई गई फसलों में पानी फिर गया। पानी के तेज बहाव से फसलें पूरी तरह से तहस-नहस हो गई। किसानों की मानें तो बीते एक से 13 अगस्त तक किसानों की ओर से धान की फसलें लगाने का कार्य निरंतर जारी रहा।
किसानों ने सरकार के प्रति जताया रोष
जिला प्रशासन और सरकार की लेटलतीफी के चलते किसानों की खराब फसलों का सर्वे सही समय और ठीक से नहीं किया गया, वहीं किसानों ने काफी दिनों तक सर्वे टीम का इंतजार करने के बाद बीते करीब 15 दिनों से धान की फसलें लगाने का सिलसिला शुरू किया हुआ था, वहीं जिला प्रशासन की टीम सर्वे करने के लिए बीते दो-तीन दिनों से गांव में पहुंची थी। खेतों में दुरुस्त दिखाई देने वाली फसलों को सर्वे में शामिल नहीं किया, जबकि किसान बार-बार उनको यही समझाने का प्रयास करते रहे कि खेतों में यह फसल दोबारा से लगाई गई है, मगर मौके पर मौजूद सर्वे टीम जांच अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी के अनुसार ही किसानों की फसलों का सर्वे किया। कुदरत के इस कहर ने दोबारा किसानों को उसी जगह पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है, जबकि जिला प्रशासन व सरकारी तंत्र की ओर से किसानों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।