अंबाला सिटी। कोर्ट के नोटिस जारी करने पर भी क्लर्क ने नोटिस को लेकर कोई आगामी कार्यवाही नहीं की। इस पर नगर निगम आयुक्त डॉ. संगीता तेतरवाल ने बिल्डिंग ब्रांच के क्लर्क आशीष कुमार को सस्पेंड कर दिया है। आयुक्त ने क्लर्क का हेडक्वार्टर अंबाला शहर नगर निगम बनाया है।
नगर निगम आयुक्त डॉ. संगीता तेतरवाल ने बताया कि शहर के पालिका विहार में एक निर्माण को लेकर कोर्ट ने नोटिस जारी किया था, मगर क्लर्क ने इस कोर्ट नोटिस को लेकर आगामी कार्यवाही नहीं की। जिससे निगम की ओर से कोर्ट में कोई पेश नहीं हो सका। इसके बाद निगम आयुक्त ने मामले में एक्शन लेते हुए क्लर्क को सस्पेंड कर दिया।
हैरानी की बात है कि यह पहला मामला नहीं है जब नगर निगम में कोर्ट आदेश को लेकर गंभीरता न दर्शायी हो। इससे पहले भी रेन बसेरा व बेसहारा पशुओं की समस्या पर सीजेएम की तरफ से जारी किए गए पत्रों को भी शिकायतकर्ताओं ने काफी मशक्कत के बाद खोजकर निकलवाया था। ऐसे में जब कोर्ट के आदेश फाइलों में दब जाएंगे और अधिकारियों के संज्ञान में नहीं आएंगे तो ऐसे ही कोर्ट की सख्ती देखने को मिलेगी।
यह है पूरा प्रकरण
दरअसल, शहर के पालिका विहार में करीब 616 वर्ग गज भूमि निर्माण को लेकर नरेंद्रपाल मल ने याचिका डाली हुई है। मामले में हाइकोर्ट ने आयुक्त को नरेंद्रपाल मल की सुनवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निगम ने मल की सुनवाई नहीं की तो हाइकोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट अवमानना करने के बाद कोर्ट के नोटिस जारी करने पर भी नगर निगम की तरफ से कोई कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त डॉ. संगीता तेतरवाल पर 10 हजार का जुर्माना लगाया और जमानती वारंट जारी कर दिया। वहीं, पहले भी देखने में आया है कि नगर निगम में ऐसे कई मामले चल रहे हैं जोकि कोर्ट में विचाराधीन हैं। कर्मचारियों के ढुलमुल रवैया के कारण निगम अधिकारियों पर पहले भी कोर्ट के आदेशों की अवमानना में कार्रवाई हुई है।