संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन ने सरकार की वादा खिलाफी के विरोध में 16 फरवरी को हड़ताल पर जाने का नोटिस जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा को सौंपा। जिला प्रधान ललिता कुमारी के नेतृत्व में वर्कर्स ने मांगों की अनदेखी के विरोध में प्रदर्शन करते हुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा को 16 फरवरी को स्कूलों में दोपहर का भोजन नही बनाने की लिखित में सूचना दी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री कई बार वर्कर्स की मांगों को जायज मान चुके है, परंतु अभी तक एक भी मांग को लागू नहीं किया है। उन्होंने बताया कि वर्कर्स को साल में 10 महीने की बजाय पूरे 12 महीने का मानदेय देने बारे कई बार आश्वासन दे चुके है, लेकिन यह अभी तक नहीं मिला है। वर्दी भत्ता 600 रुपये सालाना से बढ़ाकर दो हजार रुपये करने पर भी सहमति हो चुकी है, जोकि अभी तक पेंडिंग है। रिटायरमेंट पर मिड डे मील वर्कर्स को एक पैसा भी नहीं मिलता, जबकि अन्य परियोजना वर्कर्स को दो लाख रुपए दिए जा रहे है। इस भेदभाव को खत्म करने का आश्वासन भी कोरा साबित हुआ है
सीटू जिला प्रधान बाबू राम व सचिव सतीश सेठी ने कहा कि वर्कर का मुख्य काम स्कूल में बच्चों के लिए खाना बनाना ओर उन्हें वितरित करना है, मगर कई स्कूलों में उनसे पियन व चौकीदार का काम भी लिया जाता है। यही नहीं कुछ स्कूलों में तो स्वीपर का काम तक लेने की शिकायतें मिली है। उन्होंने कहा कि यदि वर्कर्स को उसके काम निपट जाने के बाद स्कूल में रोका गया या अन्य काम करवाया गया तो 16 फरवरी की हड़ताल के बाद शिक्षा सदन पर मोर्चा लगाया जाएगा।
ये हैं मांगें
मिड-डे मील वर्कर्स को पक्का किया जाए। न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये लागू किया जाए। वेतन का भुगतान हर महीने की सात तारीख तक वर्कर्स के बैंक खाता में किया जाए। इ रिटायरमेंट उम्र 65 साल कर दो लाख रुपये का लाभ मिलेष वर्दी भत्ता दो हजार रुपये सालाना किया जाए। हटाई गई वर्कर्स को काम पर दोबारा रखा जाए। ईएसआई व पीएफ का लाभ मिले। घायल होने पर मुफ्त इलाज व 50 हजार और मृत्यु होने पर पांच लाख सहायता की जाए। योजना का 12वीं कक्षा तक विस्तार हो। कम छात्र संख्या के नाम पर स्कूलों को बंद या मर्ज करने की नीति पर रोक लगे। शिक्षा नीति 2020 को रद्द किया जाए।