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माता बाला सुंदरी मंदिर : 12 साल तक वस्त्रों ली वस्त्रों की सेवा

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माता बाला सुंदरी जी का दरबार।
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रमाकांत अत्री
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मुलाना। माता बाला सुंदरी मंदिर आस्था का प्रतीक है। यहां 598 वर्षों से माता बाला सुंदरी जी की कृपा बरस रही है। राजस्थानी भाटों के अनुसार मुलाना में माता बाला सुंदरी की दिव्य पिंडी 1426 में मुलाना में स्थापित की गई थी। यहां माता रानी के वस्त्रों को श्रद्धालु अपनी प्रतिवर्ष की बारी के हिसाब से चढ़ाते हैं।
हर वर्ष श्रद्धालु माता बाला सुंदरी के लिए वस्त्र पहनाने के लिए अपना नाम अंकित कराते है। बारी के अनुसार उनका नंबर आता है। माता को नए वस्त्र पहनाने के लिए 12 साल की अग्रिम बुकिंग कराई हुई है। जिसमें माता बाला सुंदरी के वस्त्र सहित मंदिर पर 105 फीट ऊंचाई पर लहराने वाला ध्वज भी शामिल है। इसके लिए श्रद्धालु स्वेच्छा से बुकिंग कराते है।
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मुलाना में माता बाला सुंदरी मंदिर को पांच मंजिल बनाया है। मंदिर के भवन की ऊंचाई 105 फीट की है। 105 फीट ऊंचे भवन पर माता बाला सुंदरी का लाल झंडा लगा है। पहले नवरात्रे के दिन मंदिर में झंडा रस्म अदा की गई। पुराना झंडा बदल नया झंडा लगाया गया। मंदिर कमेटी सचिव अशोक राणा का कहना है मंदिर में साल में नवरात्रों के दौरान झंडे को बदला जाता है। यदि कभी झंडा फट जाए या अन्य किसी कारण से सही न रहे तो उसे गुप्त नवरात्रों में बदला जाता है।





तीन पीढ़ियों से बना रहे वस्त्र

माता बाला सुंदरी के तीन पीढ़ियों से वस्त्र बना रहे परिवार के रमन बताते है कि माता के वस्त्र उन की दुकान पर सिले जाते है। वस्त्रों को लेकर 12 साल की अग्रिम बुकिंग चल रही है। अभी उन के पास साल 2036 तक की अग्रिम बुकिंग है। रमन बताते हैं कि वस्त्रों में करीब 17 हजार रुपये का खर्च आता है। माता बाला सुंदरी, भैरों महाराज, कालीमाता, माता के गण, भगवान शिव, ध्यानु भगत व सभी प्रकार के छोटे व बड़े झंडे वस्त्रों में शामिल रहते हैं। उन का कहना है कि अग्रिम बुकिंग करने के समय कोई एडवांस राशि नहीं ली जाती। वस्त्र तैयार करने से एक महीने पहले श्रद्धालु को सूचित कर दिया जाता है। रमन के अनुसार उन के बाबा केसों राम, श्रवण राम, पिता रामपाल कार्य करते हैं अब वह अपने पिता रामपाल और छोटे भाई संदीप के साथ इस कार्य में लगे हैं।
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36 किलो चांदी से बना मां का दरबार :

एक श्रद्धालु ने माता बाला सुंदरी जी पिंडी के लिए 36 किलो चांदी से बने दरबार में 18 किलो चांदी की कीमत 15 लाख रुपये गुप्त दान में दी। आधे पैसे मंदिर कमेटी ने दिया। इसमें चढ़ावे की चांदी शामिल है। श्रद्धालु दानवीर ने अपना नाम उजागर तक नहीं किया। यह दान श्रद्धालु ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर दिया बताया जा रहा है। यह गुप्तदान श्रद्धालु ने अप्रैल 2022 में दिया था।
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