मुलाना। हलका मुलाना के गांव कांसापुर के मनजीत सिंह कारगिल युद्ध में सबसे कम उम्र में शहीद हुए। मात्र 17 साल की उम्र में भारतीय सेना में भर्ती हुए और डेढ़ साल बाद कारगिल में शहीद हो गए। मनजीत के बारे में ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि वे कम उम्र, अदम्य साहस और शहादत देकर कारगिल में जीत का मार्ग प्रशस्त कर गए।
शहीद मनजीत सिंह का जन्म किसान गुरचरण सिंह के घर हुआ। उनके पिता बताते हैं कि मनजीत सिंह 1998 में 8 सिख रेजीमेंट अल्फा कंपनी में भर्ती हुए। सेना में भर्ती होने के करीब डेढ़ वर्ष बाद ही पाकिस्तान ने हमला बोल दिया। इस दौरान मनजीत सिंह की ड्यूटी कारगिल में लगी। सात जून 1999 को टाइगर हिल में कई दुश्मनों को मारने के बाद उन्होंने शहादत पाई। कांसापुर के शहीद सिपाही मनजीत सिंह की माता सुरजीत कौर कहती हैं कि मुझे गर्व है कि मेरे लाल ने देश पर सर्वस्व वार दिया।
गांव में जाने का रास्ता तक नहीं
शहीद मनजीत सिंह के पिता गुरचरण सिंह ने कहा कि नेशनल हाईवे 344 पर उनका गांव पड़ता है। हाईवे पर पड़ने वाले उनके गांव को जाने के लिए रास्ता तो दूर की बात कोई कट तक नहीं है। उनके गांव में जाने के लिए डेढ़ किलोमीटर घूमकर गांव में आना पड़ता है। उनके पिता बताते हैं कि प्रधानमंत्री तक को इस बारे में चिट्ठी लिखकर रास्ता मांगा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
शहीद के नाम का स्कूल भी बंद
शहीद मनजीत सिंह के गांव कांसापुर में बच्चों के शहीद मनजीत सिंह के नाम से राजकीय प्राथमिक विद्यालय खोला था। इसे विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण बंद कर दिया गया। परिजन और ग्रामीण लंबे समय तक इस स्कूल को दोबारा खोलने की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब हालात ये हैं कि यहां के बच्चों को दूसरे गांव के स्कूल में जाना पड़ता है। स्कूल का मुख्य गेट तक गायब हो गया है। हालांकि शहीद के नाम पर एक गैस एजेंसी फिलहाल सरकार की ओर से अलॉट की गई है, जो चल रही है।
गौरव पट्ट पर शहीद का नाम तक नहीं :
गांव कांसापुर में लगे गौरव पट्ट पर शहीद मनजीत सिंह का नाम अंकित नहीं है। जबकि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार गांवों के प्रवेश द्वार पर जो गौरव पट्ट बनाए हैं। उन पर गांव का गौरवमयी इतिहास सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है। गांव के मुख्य विकास कार्य, गांव की जनसंख्या, किसी ने यदि किसी भी क्षेत्र में गांव का नाम रोशन किया है, गांव के खिलाड़ियों के नाम, दानवीरों के नाम, गांव के शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों इत्यादि के नाम, इसके अलावा कोई बड़ी उपलब्धि के बारे में अंकित किया जाता है। गांवों में बनाए गौरव पट्टों का उद्देश्य है, लेकिन गांव कांसापुर के गौरव भारत मां की रक्षा करते शहीद हुए मनजीत का नाम गौरव पट्ट पर अंकित होना चाहिए।