अंबाला। सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा... यह पंक्तियां अमेरिका में रहने वाले यूएसए इंडिया फाउंडेशन चैंबर के चेयरमैन पद्मश्री अशोक मागो पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। पढ़ाई के बाद अमेरिका में जाकर परिवार संग बस गए। स्वर्गीय पिता श्री दिवान चंद मग्गो के 1974 में देहांत के बाद उनका भारत आना-जाना बेहद कम हो गया लेकिन अपने देश के प्रति प्यार काम नहीं हुआ।
कोरोना काल में जब पूरा भारत संकट से जूझ रहा था तो वे एक रक्षक के रूप में सामने आए। अमेरिका में बनाई गई संस्था यूएसए इंडिया फाउंडेशन चैंबर के बैनर तले वहां को लोगों को अपने संग जोड़ा और देश के करीब 10 से 12 राज्यों में करीब 2 मिलियन डॉलर यानी करीब 16 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई। वेंटिलेंटर से लेकर ऑक्सीजन कंसल्टेंटर व पीपी किट आदि उपलब्ध करवाया। यहां तक कि अंबाला में भी ऑक्सीन जनरेशन प्लांट भी दान किया। हरियाणा के लिए कोरोना में बड़ी मदद के लिए रूप में सहारा बने थे।
बिजनेसमैन अशोक मग्गो ने बताया कि समाजसेवी कार्यों को देखते हुए वर्ष2010 में प्रवासी भारतीय सम्मान से दिल्ली में नवाजा गया। इसके बाद 2014 में उन्हें पद्मश्री मिला और 2018 में उन्हें हरियाणा गौरव सम्मान मिला। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय श्री दिवान चंद मग्गो माल रोड अंबाला छावनी में रहते थे। वह दिल्ली के न्यू बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी करते थे। वहां से पढ़ाई करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस एट डॉलस में मास्टर डिग्री शुरू की और अपनी पत्नी मोनिका संग वहीं शिफ्ट हो गए थे। पत्नी ने बेटी अजय व बेटी अनीता को जन्म दिया। 1974 में पिता के देहांत के बाद भारत आना-जाना बेहद कम हो गया है।
बाक्स
अमेरिका में बैंक की नौकरी के बाद बने बिजनेसमैन
अशोक मग्गो ने बताया कि वह बैंक में नौकरी करने के बाद रियल एस्टेट में चले गए थे। अंबाला में उनके दो दोस्त जयकिशन व श्रीपाल हैं और उनसे मिलने के लिए आते थे। अमेरिका में दोस्तों के संग मिलकर यूएसए इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स व फाउंडेशन बनाया। उसमें कई ऐसे परिवार शामिल थे, जो रह भले ही विदेश में हो लेकिन उनका जुड़ाव भारत के प्रति था। उन्हें संग जोड़ा और फिर भारत में कोरोना काल के बाद मदद के लिए हाथ बढ़ाए थे। वह डॉलर्स इंडियन लॉयंस क्लब के डिस्ट्रिक गर्वनर 1995 व 96 तक रहे और अब वह सदस्य हैं।