अंबाला सिटी। सीबीएसई के बाद अब रविवार को कॉउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन नई दिल्ली (सीआईएससीई) ने 10वीं का परिणाम जारी कर दिया। शहर के बैल टॉल पब्लिक स्कूल की छात्रा खुशी मलिक ने 96 प्रतिशत अंक लेकर स्कूल में टॉप किया। इसी तरह भव्या ने 95.8 प्रतिशत अंक लेकर द्वितीय व गुनगुन ने 94.2 प्रतिशत अंक लेकर तृतीय स्थान हासिल किया। रविवार होने के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंचे। विद्यार्थियों को स्कूल प्रिंसिपल हरबानी कौर ने बधाई दी। अभिभावकों ने भी अपने बच्चों का मुंह मिट्ठा करवाया।
शुरू से ही पढ़ाई पर रखा फोकस
खुशी मलिक ने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। खुशी के पिता प्रवीन कुमार का सेल्फ बिजनेस हैं। माता गीता शहर के सात नंबर स्कूल में सरकारी टीचर हैं। खुशी ने बताया कि उसने शुरू से ही पढ़ाई पर फोकस रखा। स्कूल टीचर्स ने भी बहुत अच्छे तरीके से पढ़ाया। उसने घर पर रिविजन किया। खुद सेल्फ स्टडी की। उसने पढ़ाई का ज्यादा दबाव नहीं लिया। खुशी ने बताया कि वह आईएएस ऑफिसर बनना चाहती है। उसने ऑर्ट्स में दाखिला लिया है।
घर पर सेल्फ स्टडी की
भव्या के पिता संजीव तिवारी प्राइवेट जॉब करते हैं। माता सुधा रानी गृहिणी हैं। भव्या ने बताया कि वह स्कूल से घर आकर रिविजन जरूर करती थी। उसने घर पर ही सेल्फ स्टडी की। पढ़ाई में उसकी माता और भाई दिव्यांश तिवारी ने सहायता की। उसे उम्मीद थी कि 90 प्रतिशत तक अंक आएंगे। स्कूल टीचर्स ने भी हमेशा उसे गाइड किया। भव्या ने बताया कि वह रात तक पढ़ती थी। जितना सिलेब्स स्कूल में पढ़ाया जाता था, उसको घर आकर जरूर पढ़ती थी।
खुद के नोट्स बनाकर तैयारी की
गुनगुन ग्रोवर ने 94.2 प्रतिशत अंक लिए। पिता अरविंद्र ग्रोवर बिजनेसमैन हैं। माता पूजा गृहिणी हैं। गुनगुन ने बताया कि उसने अब नॉन मेडिकल संकाय लिया है। वह इंजीनियर बनना चाहती है। गुनगुन ने बताया कि उसने घर पर रेगुलर पढ़ाई की। परीक्षा की तैयारी के लिए खुद के नोट्स भी बनाए। जितना सिलेब्स पढ़ लेती थी, उसकी रिविजन नोट्स बनाकर करती थी ताकि अच्छे से तैयारी हो सके। पढ़ाई में उसकी माता और बहन शालू सेठी ने सहायता की।
रोजाना शेड्यूल बनाकर पढ़ाई की
सेंट पॉल स्कूल के राहत छाबड़ा ने 89.7 प्रतिशत अंक हासिल किए। राहत के पिता अमित छाबड़ा कांवला में जेबीटी टीचर हैं और माता रजनी छाबड़ा सौंडा में जेबीटी टीचर हैं। राहत ने बताया कि अब वह नॉन मेडिकल से पढ़ाई करेंगे। वह इंजीनियर बनना चाहता है। उसने शेड्युल बनाकर पढ़ाई की। परीक्षा के दिनों में देर रात तक पढ़ाई की। माता-पिता दोनों टीचर हैं। उन्होंने बिना प्रैशर लिए परीक्षा की तैयारी करने के लिए मोटिवेट किया।