अंबाला सिटी। शहर के कारसेवकों की अनुपम तपस्या की कहानियां धीरे-धीरे लोगों के सम्मुख आ रही हैं। वर्ष 1990 में मुलायम सिंह सरकार ने बरेली के पास धर्मशाला में रुके अंबाला के अशोक भाटिया, अजय प्रजापति पर रात में लाठियां बरसाईं।
ये लोग किसी प्रकार अयोध्या की ओर जाने वाली गाड़ी में सवार हो गए। ट्रेन में भी पुलिस का छापा पड़ा। जहां अपने साथ लेकर गए खल के सैंपल को दिखा अशोक भाटिया ने खुद को व्यापारी बताया। इसी प्रकार अजय जो टीवी रिपेयर का काम करते थे, उन्होंने अपने औजार साथ रखे थे। जिनको पुलिस को दिखा किसी प्रकार गिरफ्तारी से बचे। राम सेवा का जज्बा सभी में इतना ज्यादा था कि रेल के लोको पायलट भी कारसेवा की योजना में शामिल था।
उसने योजना के अनुसार रास्ते में तीन बार इंजन की सीटी बजा कर कारसेवकों को अयोध्या के जंगल वाले गुप्त मार्ग में उतरने का इशारा दिया। घुप अंधेरे में रेल से उतरते ही सभी कारसेवकों को एक लगभग 85 साल का बुजुर्ग मिला जिसका कार्य उनको जंगल के रास्ते से सरयू किनारे ले जाना था। 23 किलोमीटर पैदल चलने के बाद सभी लोग सरयू किनारे पहुंचे। परंतु उस पार भारी पुलिस बंदोबस्त होने के कारण दो दिन जंगल में ही छिपे रहे। जानलेवा ठंड में बिना किसी इंतजाम के खुले में नदी किनारे ही दो रात गुजारीं। इस प्रकार कारसेवकों की मार्मिक आपबीती सुन कर रौंगटे खड़े हो जाते हैं।