अंबाला सिटी। हवा में बढ़ रहे प्रदूषण और खराब वातावरण के कारण सितंबर में ही मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो जाती है।अक्तूबर आते-आते अस्पताल में ओपीडी दो हजार के नजदीक पहुंच जाती है। इन मरीजों में अधिकतर सर्दी और आंखों में जलन के मरीज अधिक होते हैं।
इसे देखते हुए इस बार सभी पीएचसी और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्यावरण के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 10 दिनाें तक जारी रहेगा। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को पराली, पटाखे न जलाने का परामर्श दिया जाएगा।
हर केंद्र में लगेंगे पौधे
विभाग की ओर से सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को अपने क्षेत्र में पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विभाग को एक लाख रुपए का बजट भी जारी हुआ है। पेड़ लगाने के लिए सभी कर्मचारियों को अपना- अपना क्षेत्र दिया जाएगा। पीएचसी स्तर पर यह पहली बार होने जा रहा है। इसके साथ ही प्लास्टिक के इस्तेमाल को भी घटाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदूषण के कारण भी झड़ते हैं बाल
डॉ सुरभि जिंदल ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों के बाल झड़ रहे हैं। इसके साथ ही खांसी, जुखाम निमोनिया और आंखों की समस्या का भी बड़ा कारण प्रदूषण ही है। अक्तूबर माह से ही खेतों में पराली जलानी शुरू हो जाती है। इससे एयर क्वालिटी इंडेक्स 250 तक चला जाता है। इससे सांस की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। वहीं घर के भीतर भी खाना बनाते हुए निकलने वाली धांस, अगरबत्ती का धुंआ भी हमारे लिए नुकसानदायक होता है। जितना हो सके इन सबके धुएं को सोने के कमरे से दूर ही रखें।
वर्जन
विभाग के निर्देशों पर सभी केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 10 दिनों तक जारी रहेगा। इसमें प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए लोगों को परामर्श दिया जाएगा। वहीं, सभी केंद्रों में पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे।
-डॉ. सुरभि जिंदल, जिला नोडल