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अंबाला कैंट की अनप्रूव्ड कॉलोनियों के मामले में अब रेवाड़ी के ईओ केके यादव चढ़े विजिलेंस के हत्थे

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करोड़ों के एनडीसी घोटाले में अंबाला विजिलेंस ने शनिवार को रेवाड़ी नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी केके यादव को गिरफ्तार किया है। मामला 2014 में अंबाला कैंट नगर निगम से जुड़ा है, जब केके यादव यहां नगर परिषद के सचिव थे। इस दौरान उन पर नियमों की अनदेखी कर कैंट एरिया की अनप्रूवड कॉलोनी में नो ड्यूज सर्टिफिकेट यानी एनडीसी जारी करने का आरोप है। इससे पहले मामले में 21 जुलाई 2022 को विजिलेंस ने छावनी नगर परिषद में कार्रवाई करते हुए एक सेवानिवृत्त समेत चार कर्मचारियों को काबू किया था। इसमें विक्रम कतियाल, गौरव, अमरदीप और सेवानिवृत्त कर्मी मोहनलाल शामिल थे।
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जानकारी के अनुसार 2013 में सरकार ने कुछ कॉलोनियों को नियमित किया था। इसके बाद एनडीसी-एनओसी के नाम पर मोटी रकम लेकर सरकार द्वारा निर्धारित नियमों को ताक पर रख कर गलत कॉलोनियों और खसरा नंबरों की एनडीसी जारी की गई थी। इस दौरान कृष्ण कुमार यादव (ईओ) छह फरवरी 2014 से 23 जून 2014 तक अंबाला छावनी नगर निगम में सचिव के पद पर नियुक्त रहे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने मिलीभगत से गलत एनडीसी जारी की। इसमें नगर निगम छावनी के तत्कालीन क्लर्क और तीन अस्थायी कर्मचारियों की भी संलिप्तता पाई गई थी।
एनडीसी के आधार पर ही वर्ष 2014 में नियुक्त रहे छावनी के तत्कालीन नायब तहसीलदार अनिल कुमार, समालखा जिला पानीपत में नायब तहसीलदार मेवा सिंह, तत्कालीन नायब तहसीलदार छावनी (सेवानिवृत्त), छावनी तहसील के तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क विक्रम दत्त, रजिस्ट्री क्लर्क रामनिवास गलत रजिस्ट्रियां करते रहे। इस संदर्भ में विजिलेंस जांच के बाद उपरोक्त आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2018 में मामला दर्ज किया गया था। वहीं एक माह पहले ही केके यादव को रेवाड़ी नगर परिषद में ईओ नियुक्त किया गया था। विजिलेंस जांच में पाया गया कि गड़बड़ी में तत्कालीन निगम सचिव और फिलहाल रेवाड़ी नगर परिषद के ईओ केके यादव की अहम भूमिका थी। इसके बाद उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी।
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नप से निगम और फिर नप बना अंबाला कैंट
अंबाला सिटी और कैंट का क्षेत्र अलग-अलग है। पूर्व में दोनों विधानसभा क्षेत्रों में नगर परिषद कार्यालय थे, जिनकी दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है जबकि बीच में जीटी रोड गुजरती है। वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने परिषद भंग कर नगर निगम का गठन किया था। दोनों नगर परिषद को इसमें समायोजित कर एवं 26 गांवों को निगम में जोड़ा गया था। इसके बाद 2019 में एक बार फिर अंबाला नगर निगम को भंग किया गया और छावनी को परिषद का दर्जा दिया गया।
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