अंबाला। श्री सतशरण योग अभ्यास आश्रम में आध्यात्मिक कथा का आयोजन हुआ। इस दौरान संत गुरु रामानंद ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने भगवान के स्वरूप, उनकी शक्ति और सृष्टि की रचना के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों से अवगत कराया। संत रामानंद ने समझाया कि जल और उसकी तरंगें देखने में अलग हो सकती हैं। परंतु उनका मूल तत्व एक ही होता है। ठीक उसी प्रकार भगवान नारायण और उनकी शक्ति में भिन्नता प्रतीत होती है। फिर भी उनके बीच अटूट और अभिन्न संबंध है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण सृष्टि की रचना और सुचारु संचालन के लिए भगवान नारायण ने अपनी शक्ति के माध्यम से अनेक स्वरूपों को प्रकट किया है। इसलिए ईश्वर और उनकी शक्ति को एक-दूसरे से पूरी तरह पृथक करके देखना उचित नहीं है। भले ही शक्ति के विभिन्न रूप दिखाई देते हों, लेकिन उसका परम और मूल आधार केवल नारायण ही हैं। संवाद