सिविल सर्जन ने 18 जुलाई को दिए थे आशा वर्कर को सर्वे करने के निर्देश, वर्करों ने जताया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। आशा वर्कर यूनियन (सीटू) ने सिविल सर्जन के 18 जुलाई को जारी निर्देशों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी पहले आईएमआई व मिशन इंद्रधनुष के काम का प्रोत्साहन सरकार से तय करवाए, तभी वर्कर सर्वे करेंगी। इसको लेकर आशा वर्कर की बैठक के बाद यूनियन की जिला कमेटी प्रधान कविता, सचिव सर्वजीत, कैशियर बलजिंदर कौर व सीटू नेता सतीश सेठी, पूजा, दिव्या, सुषमा, रजनी ने विरोध जताया।
प्रधान कविता व सचिव सर्वजीत ने बताया कि सिविल सर्जन ने आदेशों में कहा है कि अगर कोई वर्कर यह सर्वे नहीं करती तो उसको नौकरी से हटाने का मामला भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी डराकर वर्कर पर सर्वे का दबाव न बनाएं।
यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार उन्हें मात्र चार हजार रुपये मानदेय देती है। विभाग में जब भी कोई नई योजना व काम आता है तो वह आशा वर्कर पर थोप दिया जाता है। वर्कर को बंधुआ मजदूर बनाकर रख दिया है। यहां तक कि वर्कर को ऑनलाइन काम करने के लिए भी मजबूर किया जाता है। इन सबके चलते आशा वर्करों का असल काम जच्चा व बच्चा के स्वास्थ्य की देखभाल पीछे छूटता जा रहा है।
आशा वर्कर यूनियन ने जायज मांगों न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, प्रोत्साहन के काटे गए 50 प्रतिशत का भुगतान करने, ईएसआई व ईपीएफ लागू करने, हेल्थ वर्कर का दर्जा देने के लिए सरकार को तीन दिन 8, 9,10 अगस्त की हड़ताल पर जाने का नोटिस दे दिया है। अगर यह निर्देश वापस नहीं लिए गए तो जिला भर की वर्कर को हड़ताल से पहले ही सिविल सर्जन के खिलाफ मोर्चा लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।