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हैफेड ने भी पोल्ट्री फार्मर्स को बाजरा देने से हाथ खड़े किए, 4.63 करोड़ मुर्गियां तोड़ने लगी दम

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हैफेड ने भी पोल्ट्री फार्मर्स को बाजरा देने से हाथ खड़े किए, 4.63 करोड़ मुर्गियां भूखमरी से तोड़ने लगी दम माई सिटी रिपोर्टर अंबाला। कोरोना वायरस की वजह से पोल्ट्री उद्योग पूरी तरह तबाही के कगार पर है। अब हैफेड ने भी उद्योग को बचाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। हैफेड के अधिकारियों ने भी सभी पोल्ट्री फार्मर्स को बाजरा देने से साफ मना कर दिया है। इसके कारण 4.63 करोड़ मुर्गियां दम तोड़ने लगी हैं। फार्मर भूखी मर रही मुर्गियों को जमीन में दबाने के लिए मजबूर हैं। ज्यादातर कारोबारियों का आरोप है कि राज्य सरकार भी उद्योग को बचाने में कारगर मदद नहीं कर रही है। इसी वजह से सभी फार्म मालिक बर्बादी की कगार पर हैं। ------------------------------- 923 मीट्रिक टन बाजरे की भेजी थी डिमांड अंबाला व बरवाला में 100 से ज्यादा छोटे बड़े पोल्ट्री फार्म हैं। इनमें 4.63 करोड़ मुर्गियां हैं। हर महीने इन पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों के लिए एक हजार मीट्रिक टन से ज्यादा बाजरे की जरुरत पड़ती है। मगर कोरोना वायरस की वजह से बाजरे की भारी किल्लत हो रही है। जिले के 94 से ज्यादा फार्मर्स ने डिप्टी डायरेक्टर के जरिए डीसी अशोक शर्मा से मुर्गियों की जिंदगी बचाने के लिए 923 मीट्रिक टन बाजरे की डिमांड की थी। कड़ी कसरत के बाद फार्मर्स को मुश्किल से 25-25 टन बाजरा ही मिल पाया। यह स्टॉक भी अब खत्म हो चुका है। लॉकडाउन की वजह से फार्मर्स अब मुर्गियों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से अब फार्मों में रोज हजारों मुर्गियां भूख के कारण दम तोड़ रहीं हैं। कोर्ट्स हमारे पास 94 पोल्ट्री फार्मर्स ने एक महीने के बाजरे की डिमांड की थी। डीसी साहब के जरिए डिमांड एमडी हैफेड को भेजी गई थी। तब हर फार्मर के पास बाजरा भेजा गया था। नई डिमांड भी हैफेड को भेजी गई है। लॉकडाउन की वजह से हैफेड के पास भी किसी दूसरे राज्य से बाजरे की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसी वजह से फार्मर्स के सामने दिक्क्त है। उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान हो जाएगा। डॉ. प्रेम सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग
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