अंबाला। टांगरी नदी में पिछली बार आई बाढ़ की चपेट में आए कई कॉलोनियों के लोगों ने आवाज उठाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। कॉलोनियों के लोग अब सामाजिक संस्था सिटीजंस ऑफ राइजिंग इंडिया आजाद नगर अंबाला के बैनर तले अपने सुझाव और मांगें प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखेंगे।
इसके लिए रविवार को काफी संख्या में लोग एकजुट हुए और रामपुर गांव के शिव मंदिर के पास बैठक कर चर्चा की। टांगरी नदी में बार-बार आने वाली बाढ़ से बचाव के लिए सभी के सुझावों को जाना और उन सुझावों के आधार पर अपनी मांगों से अवगत कराने के लिए राय रखी। मीटिंग में संस्था के अधीन 11 सदस्यों की कमेटी का गठन किया है, जिससे कि आने वाली समस्याओं का निवारण पर विचार करेगी।
हर गांव और क्षेत्र के 5-5 सदस्यों एक दूसरी कमेटी बनाई जाएगी जो क्षेत्र विशेष की मांग अथवा समस्याओं को मुख्य के कमेटी के सामने रखेगी और उन समस्याओं का समाधान प्रशासन के सामने रखेगी। मीटिंग में चांदपुरा, सरसहेड़ी, रामपुर गांव व उसके साथ लगती कॉलोनियां आजाद नगर, कमल नगर, न्यू काॅलोनी, पूजा विहार, समता विहार, सोनिया कालोनी, विकास पुरी एवं खोजकीपुर, नग्गल गांव व उसके साथ काॅलोनी प्रभु प्रेम पुरम की जनता ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। सभी वक्ताओं ने टांगरी नदी में आने वाली बाढ़ की आशंकाओं पर अपने विचार सांझा किए।
प्रशासन की ओर से वर्तमान में उठाए गए कदमों पर विचार किए। बोले कि पिछले साल 2023 की बाढ़ का दृश्य याद करके रूह कांप जाती है। लाखों का नुकसान इस क्षेत्र के प्रत्येक परिवार को झेलना पड़ा था जो आज भी भुलाए नहीं भूलता। बैठक में संदीप सिसोदिया, नीरज बक्शी, जक्सन जौन, सुरेंद्र प्रोफेसर और युवी सिंह मौजूद रहे।
प्रशासन के समक्ष रखी जाएगी ये मांगें
-जिस प्रकार टांगरी नदी पर तट पर माजरा बब्याल गांव से होते हुए करधान के पास एक पक्के बांध का निर्माण किया और एक सड़क का निर्माण कार्य भी किया। उसी प्रकार दूसरे तट पर चांदपुरा सरसेहड़ी, रामपुर, नगगल, खोजकीपुर और करधान गांव तक भी एक पक्के बांध का निर्माण किया जाए, उसके साथ सड़क का निर्माण किया जाए।
- टांगरी में बांध बनाने के लिए पास हुए बजट 8.59 करोड़ के फंड को जल्द से जल्द इस्तेमाल किया जाए।
- टांगरी नदी में अतिक्रमण है और उफान आने पर यह पानी काॅलोनियों की तरफ मार करेगा, इसलिए अतिक्रमण हटाया जाए
- करधान के पास बनने वाले पूल के लिए बढ़े-बढ़े मिट्टी के ढेर लगा रखे हैं, जो बरसात के दौरान बाढ़ का कारण बन सकते हैं उसे हटाया जाए
- टांगरी नदी में कार्य करने वाली जेसीबी की संख्या में वृद्धि की जाए ताकि मानसून आने से पहले टांगरी को गहरा करने का कार्य पूरा हो सके।