फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kisan Andolan: हरियाणा-पंजाब ही नहीं देशभर के किसान साथ; धान की MSP पर फंसा पेंच, 21 को दिल्ली कूच का एलान

Tue, 20 Feb 2024 09:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)

सार

किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच एमएसपी को लेकर बात नहीं बन पाई है। जिसके कारण फिर से किसानों ने 21 फरवरी को दिल्ली कूच का एलान कर दिया है। 
विज्ञापन
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सात दिन बाद फिर से किसान आंदोलन ने अलग मोड़ ले लिया है। किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच चली चौथे दौर की वार्ता के बाद सरकार के प्रस्ताव से अधिकांश किसान नाराज हैं। खासकर वह किसान जो हरियाणा पंजाब को छोड़कर दूसरे राज्यों से संबंध रखते हैं।

विज्ञापन


हरियाणा पंजाब के किसानों का पेंच धान की एमएसपी पर फंसा है। यही कारण है कि किसान नेताओं ने एक सुर में 21 फरवरी को दिल्ली कूच का एलान कर दिया। किसानों ने मंगलवार तक का सरकार को समय दिया है कि वह किसानों की मांगों पर दोबारा से गौर करें अन्यथा दिल्ली कूच ही एकमात्र रास्ता बचता है।

ग्रामीण किसान संघर्ष समिति राजस्थान व किसान आंदोलन के मीडिया प्रभारी रणजीत राजू बताते हैं कि सरकार के प्रस्ताव में एक नेरेटिव सेट किया जा रहा है कि हरियाणा पंजाब की मांगें हैं, मगर ऐसा नहीं आंदोलन में कई राज्यों के किसान हैं। इसलिए मजदूर किसान मोर्चे की बैठक में हमने तय कि सरकार को मंगलवार तक का समय देते हैं, अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया और टालमटोल वाली स्थिति में रही तो 21 फरवरी को दिल्ली कूच करेंगे। 
विज्ञापन


सरकार का फार्मूला किसानों के साथ मजाक
किसान नेता रणजीत राजू ने बताया कि सरकार का एमएसपी से जुड़ा प्रस्ताव किसी काम का नहीं है। वह कह रहे हैं हमारे पास डाटा है और रिकॉर्ड है। अगर किसान धान छोड़कर मक्का, बाजरा या कोई दूसरी फसल बोते हैं तो न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी दिया जाएगा। मगर धान और गेेहूं पंजाब हरियाणा में है।

हरियाणा में भी कुछ क्षेत्र में ही धान होता है। मगर जो दूसरे राज्य हैं वह क्या करेंगे। जैसे राजस्थान में हम तो चना, सरसों, गेहूं, ग्वार, बाजरा, ज्वार, अरहर, उड़द और दूसरी फसल बोते हैं, उनका क्या होगा। अब कर्नाटक की तरफ किसान बीज की खेती करता है उसे कैसे इस फार्मूले से एमएसपी मिलेगा। सरकार को सभी किसानों की तरफ देखना होगा। यह फार्मूला तो किसानों के साथ मजाक जैसा है। अभी भी सरकार किसानों को उलझाने का काम कर रही है।

बैठक में बोला हरियाणा-पंजाब के किसान
राजू ने बताया कि रविवार को देररात्रि हुई बैठक में कहा गया कि हरियाणा-पंजाब के किसान, जबकि यह गलत था, आंदोलन में तो देशभर का किसान शामिल हैं। यहां शंभू सीमा पर देशभर का किसान बैठा है। जो वादा सरकार ने एमएसपी देने का किया था उस मांग के लिए बैठा है। एमएसपी देने से किसान ही नहीं बल्कि मजदूर और ग्राहक भी बचेगा।

सभी राज्यों की लड़ रहे लड़ाई
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के किसान नेता जयसिंह जलबेड़ा ने बताया कि सरकार से इसलिए बात नहीं बन पा रही है क्योंकि सरकार की शर्त है कि धान नहीं लगाना। ऐसा हम नहीं कर सकते हैं क्योंकि हमारे 80 प्रतिशत किसानों के पास धान मुख्य फसल है। क्याेंकि हमारे यहां चिकनी मिट्टी है। इसमें जब पानी देते हैं ताे धान के अलावा दूसरी फसल नहीं होती है। वहीं दाल, मक्की, सूरजमुखी पर एमएसपी की बात ही नहीं की गई। करीब छह फसलों पर एमएसपी देने की बात कहते हैं। हम सभी राज्यों की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारे पास हिमाचल प्रदेश के सेब उगाने वाले भी किसान हैं। धान पर एमएसपी देने की बात कह रहे हैं मगर शर्त लगा रहे हैं। जो हमें मंजूर नहीं। यह दूसरी मांगों पर कह रहे हैं कि आप धरना उठा लो हम सभी मांगें मान लेंगे।

वार्ता और टकराव दोनों के लिए तैयार
किसान नेता जयसिंह जलबेड़ा ने कहा कि 21 फरवरी को हम दिल्ली कूच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। पहले हमारी कोशिश है कि शांतिपूर्ण वार्ता से हल निकल जाए, अगर हल नहीं निकलता है तो दिल्ली कूच करेंगे। चाहें फिर टकराव में लाठियां और आंसू गैस के गोले ही क्यों न झेलने पड़ जाएं। वहीं हरियाणा में किसानों को काफी सख्ती से सरकार और प्रशासन ने रोक रखा है हम बैरिकेड से आगे बढ़ेंगे ताे हरियाणा के किसान भी हमारे साथ आगे जुड़ जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें