फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों ने फिर फूंका आंदोलन का बिगुल

विज्ञापन
विज्ञापन
एमएसपी कानून सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में किसानों ने एकबार फिर मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में शंभू बॉर्डर पर एकत्रित हुए किसानों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी ओर किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेते समय किसानों से जो-जो वादे किए थे, उन्हें तुरंत प्रभाव से पूरा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कृषि कानूनों के विरोध के दौरान जो मामले दर्ज हुए थे, वह अभी तक सरकार ने वापस नहीं लिए हैं। लखीमपुर खीरी घटना में भी अभी तक किसानों को इंसाफ नहीं मिला है। उन्होंने जल्द ही वादों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि पांच अगस्त को किसान संगठनों की ओर से उपायुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से भाग लेने की अपील की। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर हक के लिए बड़ी लड़ाई लड़ने की बात कही।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शामलात देह जुमला मालिकान जमीनों के अधिग्रहण के विरोध में भी किसानों ने प्रदर्शन करने का एलान किया है। किसानों का कहना है कि बहुत से किसानों का पालन पोषण ही इस जमीनों के बल पर चल रहा है। अगर सरकार किसानों से इन जमीनों को ले लेगी तो उनके आगे रोजी रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।
विज्ञापन

रविवार को हुए प्रदर्शन में किसान यूनियन भगत सिंह, किसान यूनियन टिकैत के प्रतिनिधि दिखाई दिए, परंतु इसमें भातरीय किसान यूनियन चढूनी के किसान नहीं शामिल हुए। इस बारे में भारतीय किसान यूनियन चढूनी के जिला अध्यक्ष मलकीत सिंह ने कहा कि चाहे उनके संगठन को संयुक्त किसान मोर्चा से अलग कर दिया गया है, परंतु वह हमेशा किसानों के साथ खडे़ रहेंगे। आने वाले दिनों में चरखी दादरी में सरकार द्वारा शामलात जमीनों के अधिग्रहण की कार्रवाई अमल में लाने की सूचना मिली है। इस दौरान सभी किसान वहां पर एकत्रित होकर प्रदर्शन करेंगे और सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे।
किसानों के हक के लिए हमें जहां भी जाना पड़ेगा हम पीछे नहीं हटेंगे। सरकार जो भी गलत निर्णय लेगी, उसका हम पूरी तरह से विरोध करेंगे।
- सुखविंद्र सिंह, किसान नेता।
हम शुरू से ही सरकार के द्वारा लिए जा रहे गलत निर्णय का विरोध कर रहे हैं। उसी का नतीजा है कि सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेना पड़ा। अब सरकार को एमएसएपी पर गारंटी कानून भी देना पड़ेगा।
विज्ञापन

- जय सिंह, किसान नेता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें