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फर्जी दाखिला मामला : स्कूलों को सीबीआई के नोटिस

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अंबाला सिटी। फर्जी दाखिला मामले में सीबीआई की जांच अब प्रदेश के राजकीय स्कूलों तक पहुंच गई है। जांच में शामिल होने के लिए प्रदेशभर में राजकीय स्कूलों को सीबीआई के नोटिस मिलने शुरू हो गए हैं। इसमें मिड डे मील प्रभारियों को जांच के लिए बुलाया जा रहा है।
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प्रदेशभर के कई जिलों से मिड डे मील प्रभारी जांच में शामिल भी हो चुके हैं। राजकीय स्कूलों में नोटिस मिलने को लेकर राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि वह मामले के लिए 29 जुलाई को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अंबाला को ज्ञापन सौंपेंगे और 30 जुलाई को शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा से मुलाकात होगी।
दरअसल, बीते दिनों फर्जी दाखिला मामले में महानिदेशक मौलिक शिक्षा ने अंबाला जिला समेत कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, पंचकूला और यमुनानगर आठ जिलों के मिड डे मील प्रभारियों के नाम मांगे थे। विभाग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 2014-15, 2015-16, 2016-17, 2017-18 में मिड डे मील के प्रभारी रहे अध्यापक, मुख्याध्यापक, मास्टर के नाम दिए जाएं।
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सूचना में जिले का नाम, स्कूल कोड, स्कूल का नाम, मिड डे मील प्रभारी के नाम अलग-अलग वर्ष के अनुसार मांगे गए थे। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि अंबाला में 16, कुरुक्षेत्र में 52 सहित हिसार, करनाल, गुरुग्राम, सोनीपत, फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक, जींद जिलों में राजकीय स्कूलों को सीबीआई के नोटिस मिले हैं।

संघ बोला- शिक्षकों का हो रहा शोषण

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य महासचिव राजेश शर्मा का कहना है कि विभाग की गलत नीतियों का शिकार बन जिस प्रकार शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है और अब मिड डे मील की जांच के नाम पर सीबीआई का डर शिक्षकों को दिखाया जा रहा है। कई मिड डे मील प्रभारियों को सीबीआई जांच के लिए नोटिस भी मिल चुके हैं। संघ इसका विरोध करता है और संघ के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया है कि संघ सोमवार 29 जुलाई को प्रदेशभर में सभी जिलों के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से निदेशक मौलिक शिक्षा पंचकूला के नाम सीबीआई की ओर की जाने वाली जांच के विरोध में ज्ञापन सौपेंगा।

पहले होता था ऑफलाइन दाखिला : छाबड़ा
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अमित छाबड़ा का कहना है कि 2013-14 से पहले विद्यालयों में ऑफलाइन दाखिला हुआ करता था। उस समय आरटीई के तहत हर बच्चे को दाखिला देना अनिवार्य था, लेकिन 2013-2014 में एमआईएस पोर्टल आरंभ होने के बाद जिन बच्चों का आधार कार्ड नहीं था, उनका दाखिला एमआईएस पोर्टल पर नहीं हुआ। जिसके कारण विद्यालयों के बहुत सारे ऐसे बच्चे पोर्टल पर दाखिल नहीं हो पाए और सरकार की ओर से अब उन्हें फर्जी बच्चे बताकर सीबीआई जांच करवाई जा रही है। निदेशक मौलिक शिक्षा की ओर से वर्ष 2013-14 के बाद के सभी मिड डे मील प्रभारियों के नाम व 2014-15 से लेकर 2017-18 तक 4 वर्षों के छात्रों की संख्या व कितने छात्रों ने खाना खाया का सारा डाटा विभाग की ओर से मांगा गया है। पिछले वर्ष बाढ़ में जिलों में बहुत सारे विद्यालयों का रिकॉर्ड खराब हो चुका है और अब सरकार की ओर से डाटा मांगा जा रहा है। इससे अध्यापकों में भय का माहौल बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी सरकार की ओर से बहुत सारे ऑफलाइन बच्चों का दाखिला करवाया गया है, लेकिन लाभ उन्हीं बच्चों को दिया जाता है, जिनका ऑनलाइन दाखिला है। अभी भी विद्यालयों में बहुत सारे विद्यार्थी ऑफलाइन दाखिल हैं और सरकार सीबीआई का डर दिखा प्राथमिक अध्यापकों को सरकार परेशान कर रही है।
वर्जन

निदेशालय की ओर से आंकड़ा भेजने के लिए लिखित में कोई पत्र नहीं आया है। अभी राजकीय स्कूलों से यह आंकड़ा एकत्रित किया जा रहा है कि 2014 से 2018 तक छात्रों की संख्या व कितने छात्रों ने मिड डे मील खाया। इससे पहले निदेशालय ने 2014 से 2018 तक रहे मिड डे मील प्रभारियों के नाम मांगे थे। वह नाम विभाग को भेजे जा चुके हैं।
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सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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