अंबाला। सर्किल सचिव अंबाला के आह्वान पर बिजली निगम के परिसर में चल रहा धरना बुधवार को भी जारी रहा। पूर्व कार्यक्रम के अनुसार यूनियन की ओर से डीसी अंबाला को ज्ञापन दिया। इसकी अध्यक्षता सर्किल सचिव राज कुमार सेहला ने की।
ज्ञापन में मुख्य रूप से यूनियन की केंद्रीय कार्यकारिणी से वरिष्ठ उपप्रधान कृष्ण नैन, उपमहासचिव बलदेव सिंह, कुरुक्षेत्र सर्किल सचिव कृष्ण चौहान, कैथल सर्किल सचिव जितेंद्र सिंह सहित अन्य यूनियन नेता उपस्थित रहे। ज्ञापन देने के दौरान अंबाला जिले के सभी पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
दूसरे जिले से आए पदाधिकारियों ने अपने अभिभाषण में अंबाला सर्किल का पूरा समर्थन दिया और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो अपने सभी कर्मचारियों को लेकर प्रदर्शन में कूद पड़ेंगे। वहीं केंद्रीय परिषद से कृष्ण नैन ने बताया कि ज्ञापन की ओर से उपायुक्त से अनुरोध है कि कार्यकारी अभियंता अंबाला कैंट की कार्यशैली की वजह से आज पूरे अंबाला के बिजली बोर्ड कर्मचारी आंदोलनरत हैं।
ये अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों की भी बात को अनसुना कर रहा है और बैठक के तुरंत बाद दोबारा व्यक्तिगत कार्रवाई कर रहा है। ऐसी मानसिकता के साथ कोई फैसला नहीं हो सकता। इसीलिए कार्यकारी अभियंता की बदली अंबाला सर्किल से बाहर की जाए। उप महासचिव बलदेव सिंह ने कहा कि अगर निगम प्रबंधन की ओर से अंबाला सर्किल के कर्मचारियों की मांग नहीं मानी गई।
कार्यकारी अभियंता द्वारा पुलिस को दी गई अर्जी, कानूनी कार्रवाई,कर्मचारियों की गलत बदलियों को वापस नहीं लिया तो यह आंदोलन आने वाले समय में पूरे उत्तर जोन में जा सकता है और चुनावी समय में प्रदेश का माहौल खराब होगा, क्योंकि इस दौरान सारी व्यवस्था में बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है। लेकिन अगर ये कर्मचारी ही आंदोलन की राह पर होंगे तो व्यवस्था खराब हो सकती है और इसकी सारी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन की होगी।
उन्हाेंने चेताया कि जल्द ही यह आंदोलन पूरे राज्य में आएगा। ज्ञापन देने से पहले सभी बिजली कर्मचारी अग्रसेन चौक पर एकत्रित हुए और फिर कचहरी चौक से उपायुक्त के कार्यालय पहुंचे। ज्ञापन लेने के लिए डीसी ऑफिस से सिटी मजिस्ट्रेट मैडम पहुंचीं और सर्किल सचिव अंबाला राज कुमार और सर्किल सचिव पंचकुला अजय सैनी ने उन्हें पूरी जानकारी विस्तार दी और अनुरोध किया कि निगम प्रबंधन का कोई अधिकारी कार्यकारी अभियंता की किसी मुद्दे पर सहमति नहीं ले पा रहा है इसलिए वो मध्यस्थता करके इस मुद्दे को सुलझाएं और कर्मचारी की जायज मांगों पर निगम अधिकारी को सहमत करें। अगर फिर भी बात नहीं बनती तो आंदोलन खत्म करने के लिए और प्रदेश की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्यकारी अभियंता का अंबाला कैंट से तबादला कर दें।