हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही एक बार फिर छावनी के सदर क्षेत्र को फ्री होल्ड करने का मुद्दा गर्माने लगा है। इस समस्या से कई वर्षों से लोग परेशान हैं।
उनके मकान, दुकान और जमीनों की रजिस्ट्रियां बंद हैं और हैरानी की बात है कि रजिस्ट्रियां बंद होने का कारण भी उन्हें नहीं पता है। अब लोकसभा चुनाव है तो लोगों के मन में हर मुद्दा तेजी से घूम रहा है। लोगों के मन में प्रश्न है क्या कोई है जो उन्हें उनका हक दिला दे।
क्षेत्र के लगभग 12 हजार बाशिंदों को यह मुद्दा प्रभावित करता है। लगभग 10 वर्ष पहले कांग्रेस के शासनकाल में सदर क्षेत्र को फ्री होल्ड करने की योजना तैयार की गई थी और इसके लिए गठित समिति की ओर से जमीन के रेट से जुड़ी कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन होते ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया और सदर क्षेत्र के वाशिंदों का मालिक बनने का सपना अधर में लटक गया।
भाजपा आई तो इस मामले में जगह के स्थान पर मलबे का मालिकाना हक दिया यह प्रक्रिया लगभग सात साल तक चली, लेकिन अब पिछले लगभग तीन सालों से सदर क्षेत्र में मलबे की रजिस्ट्री पर भी रोक लगी हुई है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों सहित कई सामाजिक संगठन एड़ी-चोटी का जोर भी लगा रहे हैं, बावजूद इसके अभी तक कोई परिणाम नहीं आया है और न ही लोगों को राहत मिली है।
1977 का है मामला
अंबाला सदर क्षेत्र में सात तरह अलग-अलग संपत्तियां शामिल हैं। इसमें ओल्ड ग्रांट, सामान्य लीज, सरकारी अलाटमेंट, स्थाई लीज, कृषि भूमि, किराए वाली और सदर क्षेत्र से बाहर मलकियत वाली जमीन शामिल है। देश के विभाजन के समय यह जमीन केंद्र सरकार के नाम हुई थी। फिर 5 फरवरी 1977 के भारत व हरियाणा सरकार के बीच हुए इकरार के अनुसार एक्साइज एरिया की 1066 एकड़ भूमि संबंधित सभी अधिकार अंबाला कैंटोनमेंट से अलग करके निशुल्क हरियाणा सरकार को तो हस्तांतरित कर दिए गए, लेकिन कागजों में हरियाणा सरकार इस जगह की मालिक नहीं बन पाई।
अब भी मालिकाना हक के इंतजार में बाशिंदे
फ्री होल्ड वह जमीन है जिस पर विभाजन से पहले एक विशेष समुदाय के लोग रहा करते थे। जोकि विभाजन के दौरान अंबाला से पाकिस्तान पलायन कर गए। वहीं पाकिस्तान से आए वाशिंदे अंबाला के इस सदर क्षेत्र में बस गए। तभी से इस जमीन पर घर वसाने वाले लोगों की मांग थी कि उन्हें इस जमीन का मालिकाना हक मिले और उनके नाम इंजकाल व रजिस्ट्री हो। इस मांग को लगभग 47 साल बीत चुके हैं। मगर यह जख्म अभी तक नासूर बना हुआ है। हालांकि कांग्रेस के शासन काल में अंबाला कैंट के 1066 एकड़ में फैले एक्साइज एरिया (सदर एरिया) फ्री होल्ड करने के लिए कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने प्राथमिक चरण में कुछ योजना भी तैयार की थी, लेकिन शासन बदलते ही कमेटी भंग कर दी गई और यह प्रक्रिया अधर में लटक गई।
मलबे की रजिस्ट्री भी हो गई बंद
भाजपा के शासन काल में सदर क्षेत्र के लोगों को बेशक जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला, लेकिन उन्हें मलबे की रजिस्ट्री करवाने की सौगात दे दी गई। सात साल तक स्थानीय निवासियों व दुकानदारों ने मलबे की रजिस्ट्री करवाई, लेकिन अचानक इस सुविधा को भी रोक दिया गया। जबकि वित्त विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने इस संबंध में कोई भी लिखित आदेश जारी नहीं किए हैं। बावजूद इसके पिछले तीन साल से सदर क्षेत्र में मलबे की रजिस्ट्री भी बंद पड़ी हुई है।
कंडम हो रही इमारतें
फ्री होल्ड न होने का खामियाजा दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। बरसों यहां मकानों में रहने और दुकानों में कारोबार करने के बाद भी हकीकत में आजतक मालिक ही नहीं बन पाए हैं। ऐसे में सदर क्षेत्र की कई ऐसी इमारतें हैं जो गिरने की कगार पर हैं। ऐसी कुछ इमारतों को पूर्व में नगर परिषद द्वारा चिह्नित भी किया गया था। कुछ इमारतें गिरी भी, गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नही हुआ।