अंबाला सिटी। एक बार इंद्र देवलोक में अपनी पत्नी के साथ नृत्य देख रहे थे। उसी समय वहां पर देवताओं के गुरु बृहस्पति जी पधारे। इंद्र देवता ने उन्हें देखकर भी अनदेखा कर दिया, क्योंकि उसमें राजा होने का अहंकार आ गया था। कथा व्यास साक्षी गोपालदास महाराज ने कहा कि इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के सांसारिक सुख-सुविधाओं के चलते इस मानव जीव में भी कई बार अहंकार पनपने लगता है। अंबाला सिटी के सेक्टर-9 स्थित अग्रवाल भवन में चह रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे।
इससे पहले इस्कॉन प्रचार समिति शहर के सदस्यों ने कथा व्यास साक्षी गोपालदास महाराज का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इंद्र देव ने अपने गुरु का अपमान कर दिया। तब गुरु बृहस्पति जी वहां से चुपचाप चले गए। बाद में जब इंद्र देवता ने अपने गुरु को खोजने का प्रयास किया तो वह उन्हें नहीं मिले।
जब असुरों को पता चल तो उन्होंने देवलोक पर चढ़ाई कर दी। इंद्र देवताओं के पास गए। देवताओं ने कहा कि आपने गुरुदेव का अपमान किया है। इसलिए तुम त्वस्था ऋषि के पुत्र विश्वरूप को अपना गुरु बनाओ। ब्रह्मा जी के कहने पर इंद्र देवता ने विश्वरूप जी को अपना गुरु बनाया विश्वरूप ने अपने तपोबल से नारायण कवच से असुरों से राज्य छीन कर इंद्र को दे दिया।
तत्पश्चात कथा व्यास महाराज ने गुरु पूर्णिमा का संपूर्ण ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षित महाराज सुखदेव गोस्वामी से प्रश्न करते हैं कि विद्वान ब्राह्मण असुर लोग हमेशा पाप करने और रजोगुण में लगे रहते हैं, यह असुर होकर भी भगवान के भक्त कैसे बन सकते हैं। महाराज ने कहा कि कथा के समापन पर सभी भक्तों के अपार जनसमूह ने भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती में भाग लिया। इस मौके पर इस्कॉन प्रचार समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा प्रतिदिन शाम सात से दस बजे तक जारी रहती है। कथा के समापन पर भंडारे का प्रसाद सभी भक्तों को वितरित किया जा रहा है।