अंबाला। जहां धीमी रफ्तार के कारण शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं वहीं अंबाला छावनी की सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुई हैं। वहीं नगर परिषद इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है, सिर्फ फाइलों तक ही निविदाएं जारी करने का कार्य किया जा रहा है। धरातल पर पिछले दो साल से न तो कुत्तों की नसंबदी का कार्य शुरु हो पाया है और न ही बेसहारा गोवंश को गोशाला आदि भेजने का प्रबंध है।
एक ही बहाना, नहीं गोशाला
हैरानी की बात ये है कि नगर परिषद ने बेसहारा गोवंश को सहारा देने के लिए निविदा को फाइनल कर दिया है। लेकिन ठेकेदार ने अभी तक बेसहारा गोवंश को पकड़ने का काम शुरु नहीं किया है। यही कारण है कि अंबाला-साहा नेशनल हाइवे के अलावा बेसहारा गोवंश गली-मोहल्ले वालों के लिए भी सिरदर्दी बन चुके हैं। वहीं अगर इस संबंध में नप अधिकारियों से बात करो तो रटा-रटाया एक ही जवाब मिलता है कि गोशाला नहीं है और जो हैं, उनमें गोवंश को रखने से संबंधित पदाधिकारी इंकार करते हैं क्योंकि गोशालाओं में पहले से ही पशुओं की भरमार है और उनके चारे व अन्य प्रबंधों के लिए सरकार व प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती।
एक ठेकेदार दिखा रहा रूचि
कुत्तों की नसबंदी की कार्रवाई की दर्जनों कोशिशों के बाद सिरे नहीं चढ़ पाई, जबकि नगर परिषद पांचवीं बार निविदा जारी कर चुका है और बार-बार एक ही ठेकेदार इसमें रुचि दिखा रहा है जबकि नियमों के तहत तीन लोगों को निविदा भरना जरूरी है।
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कुत्तों की नसंबदी का टेंडर लगाया था, लेकिन एक ठेकेदार ने इसमें रुचि दिखाई है। वहीं बेसहारा गोवंश को सहारा देने की निविदा तो जारी कर दी है, लेकिन गोशालाओं में जगह न होने के कारण ठेकेदार ने अभी बेसहारा गोवंश को पकड़ने का कार्य शुरु नहीं किया है।
विनोद बेनीवाल, सीएसआई, नप सदर।