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Ambala News: ग्राम सरंक्षक बनाए डॉक्टरों से चरमराई नागरिक अस्पतालों की व्यवस्था, सैकड़ों मरीजों को खाने पड़े धक्के

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अंबाला। 399 सरपंचों और 3018 पंचों को पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण समारोह ने शनिवार को सैकड़ों मरीजों का दर्द बढ़ा दिया। यहां करीब समारोह के चलते 200 डॉक्टरों को ग्राम संरक्षक बनाए जाने के कारण अस्पतालों की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई।
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इस पूरे मामले में अंबाला शहर में डॉक्टरों की कमी का ज्यादा असर नहीं हुआ। जबकि छावनी नागरिक अस्पताल की अधिकतर ओपीडी लगभग बंद रही। यहां डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीज इधर से उधर भटकते नजर आए। यही नजारा जिले के पांच सामुदायिक केंद्रों और 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर देखने को मिला। मरीज दर्द से कराहते हुए अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन यहां भी उन्हें मुक्ति नहीं मिली।
ऐसे में सैकड़ों मरीज और तीमारदार जो दूर-दूर से किराया खर्चकर अस्पतालों में पहुंचे थे, उन्हें ज्यादा परेशानी हुई। वे स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कोसते हुए लौटे। छावनी नागरिक अस्पताल में केवल बाल रोग विशेषज्ञ, प्रसूति विभाग और मेडिकल की ओपीडी खुली थी। मरीज किस कद्र परेशान हुए होंगे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां रोजाना छावनी नागरिक अस्पताल की ओपीडी करीब 2500 तक होती है, वहां महज 420 रही। जबकि इमरजेंसी वार्ड का जिम्मा भी महज एक मेडिकल डॉक्टर को सौंपा था। मरीज और तीमारदार शिकायत करने पहुंचे तो उन्हें कोई अधिकारी तक नहीं मिला। पीएमओ से लेकर सभी एसएमओ भी ड्यूटियों पर थे।
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पहले देनी चाहिए थी सूचना
चुड़ियाला निवासी निर्मल ने बताया कि वह भाई को संग लेकर पहुंचा था। यहां आकर देखा कि ओपीडी के रजिस्ट्रेशन काउंटर से ही लौटाया जा रहा है। अगर ओपीडी बंद है तो उसकी सूचना पहले देनी चाहिए थी।
परेशान होकर लौटे घर
धन्यौड़ा निवासी नैबो देवी ने बताया कि डॉक्टरों ने कहीं ओर ड्यूटी लगाने से पहले उसके बारे में मरीजों और आम नागरिकों को जानकारी देनी चाहिए। उसके साथ-साथ सैकड़ों लोग दूरदराज से आए और परेशान होकर लौटने को मजबूर हुए। अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है।
ओपीडी हर हाल में खुलनी चाहिए
खुड्डा निवासी हरबंस ने बताया कि सिर में चोट लगने के बाद वह डॉक्टर को दिखाने के लिए पहुंची थी। अस्पताल में पता चला कि संबंधित डॉक्टर ही नहीं आए। किराया खर्च कर जैसे-तैसे पहुंचे और यहां आकर भी धक्के खाने पड़ रहे हैं जोकि सरासर गलत है। पहले निर्धारित होना चाहिए कि अस्पताल की ओपीडी खुलेगी कि नहीं।
अस्पताल से अधिकतर डॉक्टरों की ड्यूटी ग्राम संरक्षक के रूप में लगाई गई थी। इमरजेंसी में एक डॉक्टर थे और बाल रोग विशेषज्ञ सहित प्रसूति और मेडिकल की ओपीडी जारी थी।
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- डॉ. राकेश सहगल, पीएमओ, छावनी नागरिक अस्पताल अंबाला
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