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Ambala News: मुलाना में विकास का संकट, कठघरे में भाजपा-कांग्रेस

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मुलाना (अंबाला)। अंबाला की चार विधानसभाओं में से मुलाना विधानसभा जिला में काफी महत्व रखती है। यहां माता बाला सुंदरी मंदिर पूरे हरियाणा और आसपास के राज्यों में मशहूर है। कई प्रतिष्ठित परिवारों की माता बाला सुंदरी ईष्ट देवी हैं। इसके साथ ही तीन साहिबजादों की याद में यहां हर साल प्रसिद्ध मेला भी लगता है।
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यहां बराड़ा का रेलवे स्टेशन काफी महत्वपूर्ण है। यहां तक आकर लोग हिमाचल प्रदेश को बस से जाते हैं। खास बात है कि मुलाना सीट जिला की चार सीटों में से एकमात्र आरक्षित सीट है। यहां कांग्रेस, भाजपा और इनेलो तीनों ही पार्टियों ने राज किया है। आखिरी बाद वर्ष 2019 में पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना के बेटे वरुण चौधरी कांग्रेस की टिकट पर यहां से विधायक चुने गए थे। हालांकि हाल ही में लोकसभा चुनावों में वह सांसद बने और दिल्ली पहुंच गए।
बीते पांच वर्षों की बात करें तो स्थानीय तौर पर पानी की निकासी की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पिछले चुनाव में यह समस्या एक मुद्दा बनी थी। इसके साथ ही बराड़ा रेलवे स्टेशन के पास अंडरब्रिज में बरसाती दिनों में जलभराव की समस्या लोगों को काफी परेशान करती आई है। इसके साथ ही मारकंडा नदी के पास के गांवों के लिए पक्का तटबंध नहीं बन सका। हर बार बारिश में यहां कच्ची पटरी टूट जाती है जिससे गांव में जलभराव हो जाता है।
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मुलाना विधानसभा का सबसे बड़ा कस्बा बराड़ा है, यहां थोड़ी ही बारिश में जलभराव हो जाता है। इसके साथ ही मुलाना में विधानसभा में साहा, मुलाना और दोसड़का आते हैं। यहां कहीं भी यात्रियों के लिए क्यू शेल्टर व महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं है। अब इस सीट पर भाजपा कांग्रेस को इन्हीं मुद्दों को लेकर घेरने को तैयार है। इसके साथ ही साहा से शाहबाद ही मार्ग बनने से काफी राहत जरूर मिली है।

भाजपा में बगावती सुरों की चुनौती, कांग्रेस पर वंशवाद का लग सकता है आरोप

इस बार के विधानसभा चुनाव में अभी तक भाजपा की तरफ से पूर्व विधायक संतोष सरवन चुनावी मैदान में उतर गईं हैं तो वहीं कांग्रेस से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गुट से सांसद वरुण चौधरी की पत्नी पूजा चौधरी तो दूसरा नाम कर्मवीर सिंह का दावेदारों में चल रहा है। खास बात यह है कि इस सीट पर करीब 11 बार पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना के परिवार ने चुनाव लड़ा है। उनके बाद उनके बेटे ने यहां विधानसभा को संभाला। मगर अब जब वरुण मुलाना की पत्नी के नाम की चर्चा चल रही तो विपक्ष वंशवाद की राजनीति करने का आरोप लगाने के लिए तैयार बैठा है। कई मंचों से आरोप लगाए भी जाने लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा में भी असंतोष दिख रहा है। यहां संतोष सरवन को टिकट मिलते ही पार्टी में नेताओं के तेवर बगावती दिखने लगे हैं। हाल ही में पूर्व विधायक राजबीर बराड़ा का गुट खासा नाराज है। अभी रूठों को मनाने का दौर चल रहा है। इसके साथ ही संतोष सरवन पर बाहरी होने का आरोप लगाया जा रहा है। वहीं कांग्रेस से टिकटों की घोषणा न होने से स्थिति असमंजस में फंसी हुई है। इसके साथ ही यहां पर भाजपा ने संतोष सरवन को टिकट देकर कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं दूसरी तरफ जजपा और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से डॉ. रविंद्र कुमार को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं इनेलो-बसपा गठबंधन से अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

महाराणा प्रताप चौक की सड़क भी जर्जर

विधानसभा क्षेत्र के बराड़ा में महाराणा प्रताप चौक पर पिछले साल जुलाई में बाढ़ आने पर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसको ठीक करने के लिए छोटी मोटी मरम्मत की गई, मगर इसे पूरी तरह से ठीक करने का काम आज तक नहीं हुआ है। ऐसा तब है जब इस क्षेत्र में राजपूत मतदाताओं की संख्या भी अधिक है। यहां पर पिछले राजपूत मतदाता आखिर में भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस के साथ चले गए थे। तब भाजपा से राजबीर बराड़ा को हार का सामना करना पड़ा था। इसके साथ ही मुलाना और बराड़ा में स्वास्थ्य सेवाएं तो बढ़ी मगर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को निजी अस्पतालों का रुक करना पड़ रहा है। यहां स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य उपचार मिल जाता है।

शिक्षा का हब, सरकारी सुविधाओं का अभाव

मुलाना विधानसभा एक तरह से शिक्षा का हब कही जाने लगी है। यहां एमएम यूनिवर्सिटी के आने के बाद से विदेशों तक से विद्यार्थी अध्ययन करने आ रहे हैं। इसके साथ ही इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे क्षेत्रों की पढ़ाई कराई जाती है। मगर इस क्षेत्र में सिर्फ एक सरकारी कॉलेज साहा में है। इस कारण से मजबूरन विद्यार्थियों को अंबाला या यमुनानगर के कॉलेजों में पढ़ने को जाना पड़ता है। कुछ युवा प्राइवेट कॉलेजों में महंगी फीस देकर भी पढ़ते हैं।




विधानसभा क्षेत्र में कोई खास विकास कार्य दिखाई नहीं देते हैं। पानी निकासी की भी बहुत अधिक समस्या है। इसके लिए कई बार मांग कर चुके हैं मगर आज तक किसी भी सरकार ने समाधान नहीं दिया।
-धर्मेंद्रजीत सिंह, पूर्व सरपंच, रूकड़ी


क्षेत्र में युवाओं के रोजगार के लिए कोई संसाधन नहीं विकसित हुए हैं। इस कारण से युवाओं को दूसरे शहराें में पलायन करना पड़ रहा है, जिसको रोजगार नहीं मिलता है वह खेती में काम करता है। जबकि असल में वह अच्छी शिक्षा प्राप्त कर चुका है।
-अनिल सैनी, स्थानीय नागरिक



मुलाना हल्का लंबे समय से विकास को तरस रहा है। अस्पतालाें में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। जिसके कारण हल्के के लाेगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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-अंजू शर्मा, अधिवक्ता





वर्ष- प्रत्याशी- पार्टी

1967- आर प्रसाद- रिपब्लिकल पार्टी ऑफ इंडिया

1968- राम प्रकाश- कांग्रेस

1972- फूलचंद मुलाना- कांग्रेस

1977- शेर सिंह- जनता पार्टी

1982- फूलचंद- निर्दलीय

1987- सूरजभान- भाजपा

1991- फूलचंद मुलाना- कांग्रेस

1996- रिसाल सिंह- समता पार्टी

2000- रिसाल सिंह- इनेलो

2005- फूलचंद मुलाना- कांग्रेस

2009- राजबीर सिंह- इनेलो

2014- संतोष चौहान सरवन- भाजपा

2019- वरुण चौधरी- कांग्रेस
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