अंबाला। ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल के निर्देश पर बुधवार को अंबाला मंडल के रेलवे गार्डों ने रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता काउंसिल के मंडल सचिव कमल किशोर ने की।
यह प्रदर्शन लोहे के ट्रंक को ट्रॉली बैग से बदलने के विरोध स्वरूप था जोकि शांतिपूर्ण तरीके से और बिना काम में बाधा के किया गया। दरअसल मौजूदा समय में रेलवे गार्डों को जो ट्रंक (लाइन बाक्स) मिलता है, उसका वजन 20 किलोग्राम होता है। इसमें रेलवे मानदंड, विभिन्न उपकरणों सहित रेल पटरी पर चलाए जाने वाले डेटोनेटर और अन्य सामान होता है। रेलवे बोर्ड इसे ट्रॉली बैग से बदलना चाहता है तो वहीं गार्ड यूनियन सुरक्षा कारणों से इसका विरोध कर रही है।
गार्ड एसोसिएशन से जुड़े स्थानीय पदाधिकारियों ने बताया कि उनके पास पहले ही दो बैग होते हैं और तीसरा ट्रॉली बैग जुड़ने से उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी क्योंकि इस बैग में डेटोनेटर होंगे, जिनकी सुरक्षा उनके लिए सिरदर्दी बन जाएगी। अगर रेलवे गार्ड केबिन में ही इसकी स्थाई व्यवस्था कर दे तो उन्हें ट्रॉली बैग लेने की कोई समस्या नहीं होगी।
ट्रेन भी हो जाती है लेट
मौजूदा समय में अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर दो लगेज पोर्टर काम कर रहे हैं जो रेलवे बार्ड के लाइन बाक्स को एक से दूसरी ट्रेन में चढ़ाने और उतारने का काम करते हैं। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में 250 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है और अधिकतर से लाइन बाक्स उतारे और चढ़ाए जाते हैं। ऐसे में कई बार बाक्स चढ़ाने में देरी भी हो जाती है क्योंकि भारी-भरकम ट्रंक को चढ़ाना व उतारना और उन्हें एक से दूसरे प्लेटफार्म पर ले जाना लगेज पोर्टर के लिए भी टेढ़ी खीर होता है।
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ट्रंक का वजन पहले ही काफी होता है। जिसे ट्रेन से चढ़ाना व उतारना काफी मुश्किल होता है। इसमें कुछ ऐसा सामान होता है जोकि सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। ट्रॉली बैग में यह सामान रखना घातक हो सकता है। अगर रेलवे गार्ड के केबिन में ही कोई ढांचा बनाकर इसकी व्यवस्था कर दी जाए तो फिर किसी को भी ट्रॉली बैग लेने से इंकार नहीं है। आगामी जो भी कार्रवाई होगी वो काउंसिल पदाधिकारियों के निर्देश पर की जाएगी।
कमल किशोर, मंडल सचिव, ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल