हैफेड के गोदामों में लाखों बोरियां अनाज की सड़ने और हजारों बोरियां चोरी होने के मामले में विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है। रोजाना घोर लापरवाही के तथ्य सामने आ रहे हैं। जैसे-जैसे गेहूं की ढेरियों से तिरपालें हटाई जा रही हैं, वैसे-वैसे गेहूं के गोदामों में अनाज को रखने के इंतजाम की पोल खुलती जा रही है। इसी जांच के दौरान ये सामने आया है कि हैफेड के मोखामाजरा और मानकपुर गांव में बने गोदामों में गेहूं की बोरियां कई दिनों तक बरसाती पानी में ही डूबी रहती थी। इन गोदामों में जलनिकासी को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं किए थे।
इस तरह गीला होकर सड़ता था गेहूंजांच में यह बात सामने आई है कि मोखामाजरा और मानकपुर में बरसाती पानी गोदामों में ही इकट्ठा हो जाता था। मोखामाजरा में तो कई दिनों तक पानी गोदाम में ही खड़ा रहता था। दूसरा, तिरपालें के भीतर तक पानी रिस जाता था और पूरी गेहूं भीग जाती थी। कई दिनों बाद जब पानी सूखता था तो कर्मचारियों ऊपर से थोड़ी-थोड़ी तिरपाल को उठा दिया जाता था ताकि गेहूं की भीग चुकी हजारों बोरियों की ढेरियों को थोड़ी धूप लगवाई जा सके। लेकिन नीचे तक गीली बोरियां कैसे सूखेंगी, इसका कोई इंतजाम नहीं था। एक दिन बाद फिर से बोरियों को ढंक दिया जाता था और फिर गेहूं की बोरियों को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता था। इसी का नतीजा यह हुआ कि गेहूं की बोरियों में रखे अनाज मेें कीड़े पनप गए और गीला होने के कारण अनाज इस कदर सड़ा कि गेहूं काला होकर जम गया। इस अनाज में इस कदर बदबू उठ रही है कि इसकी जांच कर रही टीम को इन बोरियों को गिनने में बहुत ज्यादा दिक्कतें आ रही है।
कई ढेरियां तो सालो से नहीं उठीजांच में ये बात भी सामने आई है कि हैफेड गोदामों में कई बोरियों के ढेर ऐसे हैं, जिनमें से सालों से गेहूं ही नहीं उठाया गया। हजारों गेहूं की इन बोरियों को न तो हिलाया गया और न ही यहां से उठाया गया। करीबन पांच सालों से ये ढेरियां ये ही सर्दी, गर्मी व बरसात में पड़ी रही। इन्हीं ढेरियों का गेहूं सबसे ज्यादा सड़ा है और सबसे ज्यादा दुर्गंध मार रहा है। इसे देखकर अफसर भी हैरान रह गए हैं। उधर, डीसी अंबाला मनदीप सिंह बराड़ का कहना है कि विशेष टीमें अपना काम कर रही है। जल्द ही जांच रिपोर्ट सरकार तक पहुंचा दी जाएगी।