रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि बिना स्थानीय स्टाफ की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इन फर्जी नंबरों का इस्तेमाल चोरी के वाहनों को चलाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था। अंबाला के उपायुक्त को सौंपी गई इस रिपोर्ट के बाद अब पुलिस केस दर्ज होने की संभावना है। यह जांच 30 मार्च को शुरू की गई थी जिसकी विस्तृत रिपोर्ट हाल ही में प्राप्त हुई है।