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Ambala: वाहन पंजीकरण घोटाले का भंडाफोड़, हरियाणा नंबर प्लेट के साथ चल रहे थे तमिलनाडु के क्रेन

Thu, 16 Apr 2026 09:28 AM IST
Naveen माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)

सार

एक हाइड्रोलिक मोबाइल क्रेन के.पी.कंस्ट्रक्शन के नाम पर दर्ज थी, लेकिन जांच में गांव में ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली। इसका असली मालिक तमिलनाडु का निकला। 
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फ्रॉड। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंबाला छावनी के उप-मंडलाधिकारी कार्यालय में एक बड़े वाहन पंजीकरण घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले के तहत बाहरी राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हरियाणा में पंजीकृत किया जा रहा था। जांच में अब तक 200 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें भारी अनियमितताएं पाई गई हैं।

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क्या है पूरा मामला
जांच रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु और नगालैंड जैसे राज्यों के वाहनों को अंबाला के फर्जी पतों पर पंजीकृत किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा में कम पंजीकरण शुल्क का लाभ उठाना और टैक्स चोरी करना था। अब तक 213 वाहनों की पहचान की गई है जिनका पंजीकरण धोखाधड़ी से किया गया।अनुमान है कि प्रति वाहन 1 से 2 लाख रुपये अवैध रूप से वसूले गए, जो एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं।
कई वाहन ऐसी कंपनियों के नाम पर दर्ज थे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। 

इस प्रकार के मामले आए सामने
एक हाइड्रोलिक मोबाइल क्रेन के.पी.कंस्ट्रक्शन के नाम पर दर्ज थी, लेकिन जांच में गांव में ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली। इसका असली मालिक तमिलनाडु का निकला। इसी प्रकार एक अन्य क्रेन  एसआर क्रेन सर्विसेज। के नाम पर थी, जिसका मालिक कोयंबटूर का निवासी पाया गया।
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नियमों की धज्जियां
जांच समिति ने इसे राजस्व की जानबूझकर की गई हानि और दुर्भावना पूर्ण  मंशा का मामला बताया है। नियमों के अनुसार, वाहन वहीं पंजीकृत हो सकता है जहां मालिक सामान्य रूप से निवास करता हो।

प्रमुख खामियां जो जांच में मिलीं

  • अनिवार्य फॉर्म 20, 21 और 22 गायब मिले, केवल असत्यापित फोटोकॉपी फाइल में थी।
  • कोई वैध बीमा कागजात या मोटर वाहन निरीक्षक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था।
  • अंबाला में निवास का कोई वैध प्रमाण या आईडी जमा नहीं की गई थी।
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प्रशासनिक मिलीभगत का संदेह

रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि बिना स्थानीय स्टाफ की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इन फर्जी नंबरों का इस्तेमाल चोरी के वाहनों को चलाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था। अंबाला के उपायुक्त को सौंपी गई इस रिपोर्ट के बाद अब पुलिस केस दर्ज होने की संभावना है। यह जांच 30 मार्च को शुरू की गई थी जिसकी विस्तृत रिपोर्ट हाल ही में प्राप्त हुई है।
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