देशभर में नोटबंदी को लेकर जहां आम वर्ग परेशान चल रहा है, वहीं हरियाणा पुलिस को भी पसोपेश की स्थिति में डाल दिया है। क्योंकि हरियाणा पुलिस के पास भी प्रदेशभर में विभिन्न केस प्रॉपर्टी के तहत करोड़ों रुपये की नगदी बरामदगी के रूप में पड़ी है। ये करेंसी विभिन्न जिलों के पुलिस मुख्यालयों के अधीनस्थ मालखानों में सुरक्षा में रखी हुई है। इनमें काफी संख्या में 500 व 1000 के नोट भी शामिल हैं।
लेकिन अब पुलिस के समक्ष बड़ी असमंजस की स्थिति ये पैदा हो गई है कि केस प्रापॅटी के रूप में पड़ी करोड़ों रुपये की ये करेंसी देश में बंद हो गई है।
इसी को लेकर हरियाणा पुलिस के आला अफसर अब इस बिंदू पर मंथन कर रहे हैं कि आखिरकार केस प्रापॅर्टी में आई करोड़ों रुपये की करेंसी का क्या किया जाए? इस करेंसी को इस नोटबंदी के संकट से कैसे उभारा जाए और ये किस तरह से सुनिश्चित किया जाए कि नोटबंदी से पुलिस के इससे संबंधित हजारों केस प्रभावित नहीं होंगे?
इस तरह से इकट्ठा हुए हैं करोड़ो रुपये
काबिलेगौर है कि पुलिस के कब्जे में करोड़ों रुपये की करेंसी विभिन्न केसों के माध्यम से एकत्रित होती है। इन केसों में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, जुआ, सट्टा के दौरान मनी रिकवरी, हवाला के दौरान पकड़ी गई राशि, लूट, डकैती, चोरी व ठगी की मनी रिकवरी इत्यादि केस शामिल हैं। इस तरह के विभिन्न केसों में जब पुलिस नोटों की बरामदगी करती है तो संबंधित केस चलने तक इस राशि को संबंधित इलाका पुलिस मालखाने में जमा करवा देती है। इस तरह प्रदेशभर में करेंसी से जुड़े काफी मामले ऐसे हैं, जिसके अंतर्गत सभी जिलों में करोड़ों की करेंसी पुलिस के मालखाने में बरामदगी के रूप में जमा है।
इसलिए असमंजस में है पुलिस
पुलिस विभाग के आला अफसर इसलिए टेंशन में हैं, क्योंकि देश में 500 व 1000 की नोटबंदी के बाद तय सीमा तक यदि केस प्रापॅर्टी में पड़े इन नोटों को पुलिस नहीं बदलवाती तो ये करेंसी 30 दिसंबर के बाद कागज की रद्दी बनकर रह जाएगी। लेकिन चूंकि पुलिस के केस इस नगदी से जुड़े हैं। क्योंकि भ्रष्टाचार मामले में बरामद बहुत से नोटों पर पाउडर लगाया जाता है व पुलिस द्वारा हर केस में बरामद होने वाले नोटों के बकायदा नंबर लिखकर रिकॉर्ड में रखा जाता है। इसलिए यदि पुलिस इन्हें बदलवाती है तो उनके केस प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी, टेंशन यह कि यदि कोई चोरी, लूट, डकैती व धोखाधड़ी संबंधी केस निपट जाता है और इस मामले में पुलिस को आरोपी से बरामद की गई राशि पीड़ित को सुपरदारी पर लौटानी पड़ गई, तो पुलिस उसे पुरानी करेंसी ही लौटाएगी और तब तक ये करेंसी पीड़ित के लिए महज कागज का टुकड़ा मात्र होगी। जबकि तीसरी टेंशन यह कि यदि किसी केस में पुलिस को रिकवर की गई राशि केस खत्म होने पर सरकारी खजाने में जमा करवानी पड़ी, तो उस सूरत में भी ये पुरानी करेंसी रद्दी मात्र ही होगी।
वर्जन
वैसे तो नोटबंदी को लेकर पुलिस महकमे पर कोई असर नहीं है, लेकिन केस प्रॉपर्टी में जो पुरानी करेंसी बरामदगी के रूप में पुलिस के पास जमा है, उनका क्या करना है, इस बारे में विचार किया जा रहा है? ये काफी वैंधानिक मामला है, इसलिए अभी इस पर मंथन चल रहा है कि आखिरकार केस प्रॉपर्टी में पड़े बड़े नोटों का क्या किया जाए? ये बड़े नोट कितनी संख्या में हैं, इस बारे में अभी मालूम किया जाना है।
-डॉ. आरसी मिश्रा, एडीजीपी एडमिनीस्ट्रेशन, हरियाणा पुलिस