अंबाला कैंट। कैंट के नन्हेड़ा इलाके के साथ सटी मोहन नगर कॉलोनी को हुडा विभाग सेक्टर 33 के लिए अधिग्रहित करेगा या नहीं ये फैसला लेने में ही अरसा बीत गया है। इसी वजह इस कॉलोनी का अधिग्रहण मामला जहां बरसों से विवादों में घिरा हुआ है, वहीं यहां सेकेंडों परिवार कॉलोनी में अपना आशियाना बनाने को तरस रहे हैं।
यहां प्लाट खरीदे लोगों को तीस-तीस साल गुजर चुके हैं। काफी लोगों ने तो यहां कॉलोनी में मकान बना लिए थे, लेकिन अधिकतर नौकरीपेशा लोगों ने आज भी अपने प्लाट फिलहाल खाली ही छोड़ रखे हैं। उनका मानना है कि अपनी नौकरी से रिटायर्ड होने के बाद वे यहां अपना आशियाना बनाएंगे। इनमें हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ के विभिन्न शहरों के लोग शामिल है।
लेकिन आशियाना बनाने से पहले ही ये पूरी कॉलोनी हुडा विभाग के अधिग्रहण संबंधी नोटिफिकेशन के बाद विवादों के घेरे में आ गई, जिसका हल आज तक नहीं हुआ है। नतीजतन हुडा विभाग इस कॉलोनी को एक्वायर करेगा या नहीं यही फैसला अरसे से विभागीय अफसरों नहीं ले रहे हैं और इसी वजह से सैकड़ों कॉलोनीवासी पसोपेश में घिरे हुए हैं।
सन 1984 में अस्तित्व में आई थी ये कॉलोनी
मोहन नगर प्लाट होल्डरस एसोसिएशन के पदाधिकारी रिटायर्ड डीएसपी रघुबीर सिंह यादव बताते हैं कि सन 1984 में एक कालोनाइजर ने करीबन साढ़े पच्चीस एकड़ जमीन पर इस कॉलोनी को काटा था। उस वक्त सैकड़ों नौकरीपेशा और कारोबारी लोगों ने यहां प्लाट खरीद लिए थे। चूंकि उस वक्त इलाका कैंट के आउटर में था, इसलिए कई लोगों ने तो मकान बना लिए, लेकिन अधिकतर लोगों ने अपने प्लाट खाली छोड़ दिए थे। बाद में 17 मार्च 2010 के बाद ये कॉलोनी म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला का हिस्सा बन गई।
हुडा ने दो बार थमाए अधिग्रहण के नोटिस
साल 1992-93 में इस जमीन पर हुडा विभाग ने सेक्टर 33 को डेवलप करने के लिए एक अधिसूचना जारी की और यहां मोहन नगर कॉलोनी के प्लाट होल्डरों को जमीन एक्वायर करने के नोटिस थमाए। इस पर प्लाट होल्डरों में हड़कंप मच गया। मकान बना चुके लोग हाईकोर्ट पहुंचे और हाईकोर्ट ने हुडा विभाग की इस अधिसूचना को क्वेश कर दिया। लेकिन एक नई प्लानिंग के साथ फिर से सेक्टर 33 के लिए हुडा विभाग ने वर्ष 2000-01 में कॉलोनीवासियों को अधिग्रहण के नोटिस थमा दिए और इस बार फिर से कॉलोनीवासी फिर से हाईकोर्ट चले गए।
इस तरह से लटकता गया मामला
ये मामला हाईकोर्ट में कई साल विचाराधीन रहा और अंतत: 29 जून 2015 को हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि दो महीने के भीतर प्लाट होल्डर अपनी आपत्तियां हुडा विभाग के सामने रखेंगे और चार महीने के भीतर हुडा विभाग उस पर अपना फैसला लेगा। इन्हीं आदेशों के चलते मोहन नगर प्लाट होल्डर एसोसिएशन ने 26 अगस्त 2015 को अपनी आपत्तियां हुडा विभाग में दाखिल कर दी थी और इन्हीं आदेशों के चलते चार महीने बाद यानी 26 दिसंबर 2015 को हुडा विभाग ने इन आपत्तियों पर सुनवाई कर ये तय करना था कि हुडा विभाग सेक्टर 33 के लिए इस करीबन साढ़े पच्चीस एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है या नहीं लेकिन अब एक साल बीत चुका है, लेकिन हुडा विभाग के अफसरों ने आज तक इस पर फैसला नहीं लिया है। जिस वजह से प्लाट होल्डर हुडा विभाग के धक्के खाकर परेशान हो चुके हैं।
परेशान है लोग, प्लाट बिकने भी मुश्किल
इसी वजह से यहां प्लाट होल्डरों के सामने अजीब विडंबना खड़ी हो गई है। यहां लोग खुद अपने मकान बनाना चाहते हैं कि लेकिन अधिग्रहण के डर की वजह से बहुत से लोग अपने प्लाट औने-पौने दामों में बेचने को भी तैयार है। लेकिन समस्या यह है कि अधिग्रहण की संभावना के चलते इन लोगों को अपने प्लाटों के लिए ग्राहक भी नहीं मिल रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि यदि हुडा विभाग अपना फैसला ले लेता है, तो अपना आगामी एक्शन लें।
लोग हुडा विभाग के धक्के खाकर थक चुके है। इसलिए अब वे लोग सीएम और फिर पीएम के दरबार में गुहार लगाएंगे। बहुत से प्लाट होल्डरों की तो इसी इंतजार में कि वे यहां अपना आशियाना बनाएंगे, डेथ भी हो चुकी है। उनके बच्चे अब प्लाट के लिए भटक रहे है। विभाग एक बार सैकड़ों प्लाट होल्डरों को आर या पार कर दें, ताकि उसके बाद प्लाट होल्डर आगामी कार्रवाई करें। इस वक्त हुडा विभाग तो हाईकोर्ट के आदेशों की भी धज्जियां उड़ा रहा है।
-रघुबीर सिंह यादव, पदाधिकारी, मोहन नगर प्लाट होल्डर एसोसिएशन, कैंट
इस मामले की फाइल चैक करवाई जाएगी। ये मामला क्या है। और कहां तक पहुंच गया है उसके बारे में दिखवाया जाएगा। विभाग प्लाट होल्डरों से सहानुभूति रखता है, जो भी होगा नियमानुसार ही होगा।
-सुभाष चंद्र सिहाग, सीईओ हुडा एवं एसडीएम