अंबाला कैंट। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आखिरकार खेल मंत्री अनिल विज के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए अंबाला पुलिस कमिश्नरी को भंग कर दिया है। अनिल विज ही इस मुद्दे को उठाए हुए थे और उनका कहना था कि पुलिस की पहले जैसी व्यवस्था ही उचित थी। पुलिस कमिश्नरी बनने से जनता को तो कोई खासा लाभ नहीं हुआ और न ही क्राइम कंट्रोल हुआ था। इसलिए पुलिस कमिश्नरी भंग कर पहले जैसी व्यवस्था की जाए।
लिहाजा मंगलवार को हुई कैबीनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है और इस बाबत देरशाम अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
दरअसल, मंगलवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में अम्बाला-पंचकूला पुलिस कमिश्नरी में संशोधन करते हुए अम्बाला के लिए 9 अगस्त, 2011 पहले की पुलिस व्यवस्था को बहाल करने का निर्णय लिया गया। अब अन्य जिलों की तरह अंबाला में जिला पुलिस व्यवस्था बनी रहेगी।
बैठक में इस बात पर चरचा की गई कि अंबाला जिला अन्य जिलों की तरह ग्रामीण बाहुल्य जिला है। इसके दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया कि अंबाला जिले को इससे बाहर करके केवल पंचकूला के लिए पुलिस कमिश्नरी बनाई जानी चाहिए। जबकि पंचकूला जिले में शहरीकरण बढ़ रहा है और इसलिए पंचकूला प्रदेश के गुडग़ांव व फरीदाबाद जैसे शहरी जिलों की श्रेणी में आता है। इसलिए वहीं कमिश्नरी मौजूद रहेगी।
अंबाला कैंट बना उपमंडल, जनता को होगा फायदा
उधर, हरियाणा सरकार ने एक जिला, दस उपमंडलों, दस तहसीलों और तीन उप-तहसीलों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की है। इनमें अंबाला कैंट भी शामिल है। अंबाला कैंट उपमंडल बनने के बाद लोगों को बहुत ज्यादा फायदा होगा। अंबाला कैंट में अब एसडीएम स्तर का अफसर बैठेगा और एसडीएम कार्यालय के विभिन्न काम लाइसेंस बनवान, रिन्यू करवाना, आरसी बनवाना इत्यादि काम अंबाला कैंट में ही होंगे। अभी तक अंबाला कैंट के लोगों को इस काम के लिए करीबन 15 किलोमीटर दूर अंबाला सिटी तक जाना पड़ता था। यदि संबंधित दिन किसी दिक्कत की वजह से काम न हो, तो अगली दिन फिर जाना पड़ता था। लेकिन अब अंबाला कैंट उपमंडल बनने के बाद अंबाला कैंट के लोगों की ये दौड़ रूक जाएगी और उन्हे राहत मिलेगी। अभी तक अंबाला सिटी के अतिरिक्त नारायणढ़ और बराड़ा को उपमंडल का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन अनिल विज की सिफारिश पर अंबाला कैंट को भी उपमंडल का दर्जा मिल गया है।
भाजपाइयों ने मनाई खुशी, बांटे लड्डू बजाया ढोल
उधर, अंबाला कैंट में पुलिस कमिश्नरी भंग होने व कैंट को उपमंडल का दर्जा मिलने के बाद अंबाला के भाजपाई व विज के समर्थन बहुत खुश है। सूचना मिलने के बाद तमाम भाजपाई निकलसन रोड स्थित भाजपा कार्यालय के समक्ष एकतित्र हो गए और वहां उन्होंने ढोल की थाप पर जमकर डांस किया। इसके अतिरिक्त भाजपाइयों ने आतिशबाजी भी की। उसके बाद बहुत से भाजपइयों बाइकों पर एक जुलूस भी निकाला। जिसमें उन्होंने एक ढोल सवार को भी सवार कर रखा और वे बाजारों में काफी देर तक घूमकर इस खुशी को सांझा करते रहे।
पुलिस कमिश्ररी भंग होने पर अब ये होगी व्यवस्था
पुलिस कमिश्नरी भंग होने के बाद अब जिले में डीसीपी अर्बन और डीसीपी रूरल दोनों पुलिस अफसरों के पद खत्म हो जाएंगें। साथ ही तमाम एसीपी पद भी खत्म हो जाएंगें। अंबाला में पुलिस अधीक्षक यानी एसपी की नियुक्ति होगी। साथ में एडिशनल एसपी की पोस्ट भी मिलेगी। इसके अलावा एसीपी की जगह डीएसपी हेडक्वार्टर, डीएसपी नारायणगढ़, डीएसपी कैंट और डीएसपी बराड़ा तैनात होंगे। चूंकि यहां महिला थाना है, इसलिए संभावना है कि एक महिला डीएसपी का पद भी मिल सकता है। अंबाला के सभी 15 थानों व 18 चौकियों की कमान सिर्फ एसपी अंबाला की होगी। पहले शहरी क्षेत्र की कमान डीसीपी अर्बन की थी और ग्रामीण इलाकों की डीसीपी ग्रामीण के हाथों में।
उधर, विपक्षियों ने मुंह पर बांधी काली पट्टी
उधर, पुलिस कमिश्नरी टूटने पर विपक्षी दलों ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव हरीश सासन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण फैसला बताया है। उनका कहना है कि अंबाला को सिर्फ ग्रामीण बहुल्य इलाका मानकर कमिश्नरी तोडना बहुत गलत है। अंबाला आज उतर भारत का उभरता हुआ जिला है, कई बातें अंबाला में ऐसी हैं, जो देश और दुनिया में खास है। ये फैसला तो सिर्फ सरकार ने मंत्री अनिल विज को खुश करने के लिए लिया है। इसमें जनता का कोई सारोकार नहीं देखा गया है।
उधर, नागरिक मंच ने भी कमिश्नरी भंग करने का विरोध किया है। उन्होंने मुंह पर काली पट्टी बांधकर इसका विरोध किया है। नागरिक मंच के चेयरमैन ओंकार सिंह, प्रधान ओंकार नाथी, बिट्टू साहनी ने कहा कि कमिशनरी भंग होने का सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण जनता को होगा, जिन्हें 50 किलोमीटर दूर अपनी समस्याओं के लिए जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नागरिक मंच जनता के लिए हमेशा जनता के साथ खड़ा होगा। चेयरमैन ओंकार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में घमंड का कोई स्थान नई होता लोकतान्त्रिक रूप से जनता की भलाई के लिए फैसले लिए जाने चाहिए। अगर कमिशनरी भंग करने के फायदे मंत्री महोदय बता दे तो बहुत अच्छा होगा और अगर वास्तव में कमिशनरी भंग के फायदे है तो मंत्री महोदय को सारे भारत की कमिश्नरियां भंग करवा देनी चाहिए। इस मौके पर अशोक राणा, धीरज गुप्ता, संतोष कुमार, अशोक धवन, बलविंदर सिंह कालरा, घनश्याम मिश्रा, राहुल कुमार, पिंटू, संजय शर्मा, अरुण कुमार, मनोज कुमार, शिवेश शर्मा, तुषार कौशिक, राम कुमार यादव, ज्ञान चन्द गुप्ता, सुनील कुमार गुप्ता सहित काफी संख्या में मंच के सदस्य उपस्थित रहे।
अब धारा -144 की शक्तियां फिर डीसी के पास पहुंची
उधर, पुलिस कमिश्नरी भंग होने के बाद धारा 144 लगाने की पॉवर फिर से डीसी अंबाला के पास पहुंच गई है। पुलिस कमिश्ररी बनने के बाद ये पॉवर डीसीपी को शिफ्ट हो गई थी। लेकिन मंगलवार को इस बाबत नोटिफिकेशन जारी होते ही डीसी अंबाला प्रभजोत सिंह भी एक्शन में दिखाई दिए।
जिला मैजिस्ट्रेट प्रभजोत सिंह ने धारा 144 के आदेश जारी करके जिला की सीमा में विभिन्न दुकानदारों द्वारा सेना की वर्दी बेचने पर उसका रिकॉर्ड रखने के आदेश जारी किए हैं। जिला अम्बाला को पुलिस कमिश्नरी से बाहर करने की नई नोटिफिकेशन के तहत जारी इन आदेशों में उपायुक्त ने कहा कि ऐसे दुकानदारों का रिकॉर्ड प्रत्येक तीन मास के बाद एसडीएम द्वारा चैक किया जाएगा।
प्रभजोत सिंह ने बताया कि अम्बाला में छावनी का बड़ा क्षेत्र है और बहुत से दुकानदारों द्वारा सेना की वर्दी का कपड़ा बेचा जाता है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में हुई आतंकवादी घटनाओं यह तथ्य सामने आए हैं कि आतंकवादी अपनी पहचान छिपाने के लिए सेना की वर्दी डालकर ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, कानून व्यवस्था तथा नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी दुकानदार बेची जाने वाली प्रत्येक वर्दी का रिकॉर्ड रखेंगे और इस रिकॉर्ड का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाएगा। उन्होंने धारा 144 के आदेशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं और कहा कि आदेशों की अवहेलना होने पर सम्बन्धित के विरूद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।