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अंकल टीचर देते हैं गालियां, धुलवाते हैं गाड़ियां

Sat, 01 Oct 2016 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
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लाोग
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अंबाला सिटी।
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एक शिकायत मिलने के बाद जैसे ही हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण अयोग की टीम सिटी के कांवला स्थित मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स के अधीनस्थ व डीसी अंबाला की अध्यक्षता में चलने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय में पहुंची तो वहां के हालात देखकर दंग रह गई। क्योंकि यहां हालात शिकायत से कई ज्यादा बदतर थे। टीम ने पूरे स्कूल का दौरा किया और स्टाफ को अलग कर स्कूली छात्रों से अलग से बातचीत की। लेकिन उसके बाद जो तथ्य सामने आए, वो चौकाने वाले थे। बच्चों ने बहुत ही रूंधती आवाज के साथ टीम के सामने यहां स्कूल में किए जा रहे बर्ताव की पोल खोल दी। बाकायदा इस सारे निरीक्षण की वीडियोग्राफी भी की गई। टीम के साथ जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा भी शामिल रहे। अंबाला के कांवला में ये सरकार स्कूल मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत चलाया जा रहा है और डीसी अंबाला इसके चेयरमैन हैं। ये स्कूल छठी से बारहवीं कक्षा तक हैं और यहां सीमित सीटों पर प्रवेश परीक्षा के जरिये दाखिला होता है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को बोर्डिंग सुविधा भी दी जाती है, लिहाजा यहां हास्टल भी है। फिलहाल स्कूल में करीबन 448 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन्हीं में से एक छात्र के पैरेंट्स ने आयोग को यहां शिक्षकों के बुरे बर्ताव की शिकायत की थी। उसके बाद शुक्रवार दोपहर को आयोग की टीम अचानक स्कूल पहुंच गई और वहां औचक निरीक्षण कर छात्रों से रूबरू हुए। आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला टीम को लीड कर रहे थे।
आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला व टीम ने जब स्कूल स्टाफ को अलग कर बच्चों से इंटरेक्शन शुरू की तो देखते ही देखते रूंधती हुई आवाज बच्चों का दर्द फूट पड़ा। आयोग सदस्य परमजीत सिंह बड़ौला ने बताया कि बच्चों ने साफ कहा कि यहां कई टीचर उन्हें गालियां देकर संबोधित करते हैं, जबकि अपनी गाड़ियां तक बच्चों से धुलवाते हैं। इतना ही नहीं उनकी पिटाई भी की जाती है। छात्राओं तक ने कहा कि उनके साथ भी कई शिक्षकों द्वारा टोंट लैंग्वेज  में बात की जाती है, जिससे उन्हें बहुत असहजता महसूस होती है।
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सब्जी में आ जाता है पका हुआ पूरा आलू
सदस्य बड़ौला ने बताया कि बच्चों ने जब मेस के खाने को घटिया बताया तो मेस में जाकर निरीक्षण किया गया। लेकिन वहां के हालत भी बहुत खराब थे। जबरदस्त गंदगी, पानी के लिए आरओ सिस्टम भी फैल, टॉयलेट व बाथरूम भी गंदे। बच्चों ने बताया कि खाने पकाने में इतनी लापरवाही बरती जाती है कि कई बार तो सब्जी में पूरा आलू (बिना कटा हुआ) ही कटोरी में आ जाता है। रात के खाने के हालात तो ऐसे होते हैं कि बच्चों का खाने तक का मन नहीं करता। जबकि जो दूध दिया जाता है, उसमें भी पानी होता है, जिस वजह से वे बहुत ही पतला होता है।

छात्रों ने लगाया धमकाने का आरोप
यहां हास्टल में रहकर पढ़ने वाले बच्चों ने टीम को बताया कि रात को यहां एक नर्स की ड्यूटी लगती है। लेकिन यदि देर रात किसी को बुखार या दूसरी दिक्कत हो जाए और वे डिस्पेंसरी में जाएं तो वहां आराम कर रहे कर्मचारी उन्हें इस कदर डांटते हैं कि दोबारा रात को छात्र वहां जाने की सोचता भी नहीं है। बड़ौला ने बताया कि छात्रों ने तो यहां तक कहा कि उन्हें ये कहकर धमकाया जाता है कि यदि उन्होंने यहां के बारे में बाहर किसी को बताया तो उन्हें स्कूल से ही निष्कासित कर दिया जाएगा। बच्चों ने बताया कि यहां कपड़े धोने तक के लिए किसी धोबी की भी व्यवस्था नहीं है। बच्चे खुद अपने कपड़े धोने को मजबूर है। टीम सदस्यों ने इस दौरान मेस कमेटी का रजिस्टर भी देखा और मेस कमेटी के सदस्यों से भी पूछताछ की। लेकिन उनके जवाब से टीम संतुष्ट नहीं हो पाई।

जब हास्टल में फिसल गए आयोग सदस्य
 इसी निरीक्षण के दौरान टीम जब हॉस्टल पहुंची तो उन्हें लीड करते हुए आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला वहां पड़े वॉटर कूलर के आसपास कीचड़ की वजह से जमी जबरदस्त काई के ऊपर पैर पड़ते ही फिसल गए। गिरने की वजह से उनके कंधे पर भी अंदरूनी चोट आई। लेकिन आनन-फानन में उन्हें संभाला गया और खड़ा किया गया। उसके बाद उन्होंने वहां पड़ी काई मौजूदा स्टाफ को दिखाई और ऐसे हालात पर खासी हैरानी जताई। इस दौरान टीम ने शिक्षकों व प्राचार्य से भी पूछताछ की, लेकिन उनके जवाब पर टीम ने असंतोष जाहिर किया।
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एक पैरेंट्स की शिकायत आने पर ये कार्रवाई की गई थी। लेकिन स्कूल के भीतर के हालात देखकर तो दंग ही रह गए। छात्रों ने शिक्षकों पर अभद्र भाषा में बात करने, पीटने, धमकाने तक के आरोप लगाए। बच्चों को दिए जाने वाला खाने की क्वालिटी भी ठीक नहीं मिली। जबकि गंदगी के हालात देखकर तो हैरानी होती है। मैं फिसलकर गिर गया, इसकी चिंता छोड़िए, बच्चे किस हाल में यहां रह रहे हैं, वो चिंताजनक स्थिति है। मैं इसकी विस्तृत रिपेार्ट बनाकर स्कूल के चेयरमैन डीसी अंबाला व मिनीस्ट्री ऑफ ह्ुमन रिसोर्स और हरियाणा सरकार को जल्द भेजूंगा।
-सरदार परमजीत सिंह बड़ौला, सदस्य, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, हरियाणा सरकार
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