इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन
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पेपर सॉल्वर के माध्यम से पेपर लीक कराने के इतने मामले सामने आ गए हैं कि अब सरकार को एक अलग ही एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी देनी पड़ रही है। उल्लेखनीय बात यह है कि इनन सभी मामलों का केंद्र हरियाणा है। ऐसे में अब पेपर साॅल्वर से जुड़े मामलाें जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आईफोरसी यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर काे दी है।
मामले में जल्द ही कोई हल निकलकर आएगा
यह संस्था देश में साइबर अपराधों के मामलों को देखती है। इसमें पेपर सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों की जांच एक आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में कराई जाएगी। इसके लिए आईफोरसी के अधिकारियों ने संबंधित जिलों से संपर्क करना शुरू भी कर दिया है। अंबाला पुलिस से भी अब तक के मामलों से जुड़े तथ्यों को जुटाया है। ऐसे में अब इस मामले में जल्द ही कोई हल निकलकर आ सकता है।
केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती से जुड़ा है मामला
इस मामले में गृहमंत्रालय की साइबर क्राइम एजेंसी को इसलिए भी लगाया है कि पेपर सॉल्वर गैंग ने जिस परीक्षा को अपना निशाना बनाया उनमें अधिकांश स्थानों पर केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की परीक्षा अहम थी। यही कारण है कि अब गृह मंत्रालय के अधीन यह एजेंसी इस मामले की जांच में जुट गई है।
इन स्थानों पर पेपर सॉल्व के मिले थे मामले
सबसे पहले उत्तर प्रदेश के केंद्रीय विद्यालय संगठन की पीजीटी परीक्षा को लेकर वाराणसी में पेपर सॉल्व करने का मामला सामने आया। इसके बाद अंबाला में केवीके पीजीटी की परीक्षा में ऑनलाइन पेपर हल कराने का मामला मिला, इसके बाद लद्दाख में इसी परीक्षा से जुड़ा प्रकरण सामने आया। वहीं, इसके बाद आगरा में भी एक गैंग पकड़ा, जिसने केवीके पीजीटी आदि परीक्षाओं को कराया। इन सभी मामलों में गैंग का कोई न कोई कनेक्शन हरियाणा से जरूर था। इसके कारण पुलिस ने गैंग के मास्टर माइंड को पकड़ने के लिए हरियाणा में बहादुरगढ़, सोनीपत और झज्जर स्थानों पर दबिश दी मगर सफलता हाथ नहीं लगी। यह सभी गैंग कंप्यूटर को रिमोट पर लेकर अन्य स्थान से पेपर सॉल्व कराते थे।
अधिकारी के अनुसार
पेपर सॉल्वर मामले में आईफोरसी की ओर से अब जांच शुरू कर दी गई है। जोकि एक आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में की जा रही है। इसमें देशभर में आए ऐसे सभी मामले जांच में शामिल किए जाएंगे।
--जशनदीप सिंह रंधावा, एसपी, अंबाला।