बराड़ा (अंबाला)। अनाजमंडी में झोपड़पट्टी में रहने वाले सात वर्षीय बच्चे की गेहूं की बोरियों के नीचे दब जाने से बुधवार शाम को मौत हो गई। सूचना के बाद बच्चे के पिता जितेंद्र ने बालक को उठाकर सीएचसी बराड़ा में दाखिल कराया। वहां पर डॉक्टर न मिल पाने के कारण नर्सों ने चेक करके बताया कि बच्चा मर चुका है, लेकिन वह उसे मृत घोषित नहीं कर सकतीं। सूचना मिलते ही बराड़ा थाना प्रभारी सतीश कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को मुलाना एमएम मेडिकल कॉलेज में भेज दिया। वहीं बच्चे के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
जानकारी के अनुसार वाराणसी (उप्र) निवासी जितेंद्र कुछ समय से अपनी पत्नी जमीनी देवी व बालक जितेंद्र के साथ बराड़ा में अनाजमंडी के पास झोपड़ी बनाकर रह रहा था। जानकारी मिली कि जितेंद्र का सात वर्षीय बेटा गोलू अनामंडी के पास स्टाक में पड़े गेहूं के पास ब्लेड से गेहूं की बोरी काट कर गेहूं निकाल रहा था। गेहूं निकलने से गेहूं के ढेर में लगी बोरियां खिसकने लगीं और गोलू बोरियां के नीचे दब गया। वहां पर काम कर रहे मजदूरों ने बोरियां गिरी देखीं तो शक हुआ। पास जाकर देखा तो बालक दबा पड़ा था। बोरियां हटाई और बालक के परिजनों को सूचना दी।
बराड़ा सीएचसी में नहीं था डॉक्टर
जितेंद्र अपने बेटे को जब सीएचसी बराड़ा में लेकर पहुंचा तो वहां डॉक्टर नहीं था। इस दौरान वहां तैनात नर्सों ने उसे चेक कर बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। लेकिन, डाक्टर के न होने के कारण वह उसे मृत घोषित नहीं कर सकतीं। उस समय सीएचसी बराड़ा में मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं था और न ही कोई एंबुलेंस की सुविधा थी। बाद में सूचना मिलने पर साहा से एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
सीएचसी में डाक्टर न मिलने पर उठ रहे सवाल
सीएचसी में डॉक्टरों के न मिलने का यह पहला मौका नहीं है। पहले भी एक महिला की प्रसूति के बाद बच्चा मर गया था। उस वक्त भी मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं था। लोगों का कहना है कि अनाजमंडी में एक ओर जहां सीएम मनोहर लाल रैली को संबोधित कर रहे थे, वहीं अनाजमंडी में यह हादसा हो गया। सीएम रैली में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी मौजूद थे। सीएचसी के डॉक्टर भी रैली में ड्यूटी पर थे, फिर भी सवाल उठता है कि इस हादसे के दौरान डाक्टर कहां थे।
बच्चे को सीएचसी से एमएम मेडिकल कालेज में भेजा गया। वहां डाक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
- सतीश कुमार, बराड़ा थाना प्रभारी